ब्रेकिंग
Delhi Fire News: मायापुरी इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्री में लगी भीषण आग, दमकल की 11 गाड़ियां मौके पर... Tiger Shroff Firing Case: अभिनेता टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हरियाण... Afzal Ansari Hospitalized: समाजवादी पार्टी सांसद अफजाल अंसारी की अचानक तबीयत खराब, लखनऊ के मेदांता अ... Uttarakhand News: दलेर मेहंदी कॉन्सर्ट विवाद पर आया सीएम धामी का बयान, मंत्री सुबोध उनियाल के साथ हु... Bigg Boss 20 Weekend Ka Vaar: स्काउट ओपी और लव गिल की नजदीकियों पर भड़कीं गर्लफ्रेंड काश्वी हिरानंदा... TRAI New OTP Rules: फोन पर आने वाले ओटीपी नियमों में जल्द होगा बड़ा बदलाव, ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए ट... Delhi News: एमसीडी के 4,000 एमटीएस कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन, सीएम रेखा गुप्ता ने दी 52 करोड़ के ... Jharkhand BJP News: रांची में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का जोरदार स्वागत, कार्यसमिति की बै... Patna News: महिला थाने में हाई-वोल्टेज ड्रामा, प्रेमी के चक्कर में प्रेमिका ने बचपन की दोस्त की नाक ... Ranchi Dacoity Case Solved: रांची में 60 लाख की डकैती का सनसनीखेज खुलासा, महिला समेत 6 आरोपी गिरफ्ता...

Europe Protests: फ्रांस से इटली तक भड़का जनसैलाब, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग; क्या ‘अरब स्प्रिंग’ जैसी होगी स्थिति?

Paris: दुनिया को लोकतंत्र, विकास और समृद्धि का पाठ पढ़ाने वाले यूरोप के कई देशों में इन दिनों जनता का गुस्सा सड़क पर उबल रहा है। फ्रांस से लेकर सर्बिया, इटली और स्पेन तक, आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और मकानों के भारी-भरकम किराए से त्रस्त युवा सड़कों पर उतर आए हैं। पुलिस के साथ झड़प, हिंसक प्रदर्शन और विरोध के लंबे होते सिलसिले को देखकर यह बड़ा सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या यूरोप में साल 2010 जैसी ‘अरब स्प्रिंग’ की आहट फिर से सुनाई दे रही है?

विभिन्न समस्याओं से जूझते यूरोपीय देश

फ्रांस से शुरू हुआ यह असंतोष अब यूरोप के कई अन्य राष्ट्रों में भी फैल चुका है। पेरिस और मिलान में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं, जबकि स्पेन में जनता का गुस्सा फूट पड़ा है और अल्बानिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर आवाज उठाई जा रही है। कहीं सड़कों पर आगजनी हो रही है, तो कहीं लोग अपने सिर पर छत और बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। फ्रांस में जहां लोग महंगाई और शिक्षा प्रणाली की बदहाली से नाराज हैं, वहीं इटली में कम वेतन और स्पेन में आवास संकट मुख्य मुद्दे बने हुए हैं।

क्या यूरोप में आने वाला है कोई बड़ा राजनीतिक तूफान?

इतिहास गवाह है कि जब आम आदमी की जेब खाली होने लगती है, भविष्य अंधकारमय दिखने लगता है और सत्ता में बैठे लोगों के पास जनता के सवालों के जवाब नहीं होते, तो सड़कों का मिजाज पूरी तरह बदल जाता है। इसी बदलते तेवर ने विश्लेषकों को डेढ़ दशक पुरानी ‘अरब स्प्रिंग’ की याद दिला दी है। साल 2010 के आखिर में ट्यूनीशिया से उठी चिंगारी ने देखते ही देखते कई देशों की सत्ता के समीकरण बदल दिए थे। अब 2026 में यूरोप की मौजूदा तस्वीरें भी कुछ वैसे ही गंभीर संकेत दे रही हैं।

अरब स्प्रिंग और मौजूदा यूरोपीय हालात में अंतर

तुलना करें तो, साल 2010 में ट्यूनीशिया, मिस्र, लीबिया और यमन जैसे देशों में तानाशाही और सत्तावादी व्यवस्थाओं के खिलाफ जनसैलाब उमड़ा था। इसके विपरीत, यूरोप के देश लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के दायरे में आते हैं, लेकिन यहां आर्थिक दबाव, महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच चुका है। यह साफ साबित करता है कि लोकतंत्र में भी यदि नागरिकों का भविष्य सुरक्षित नहीं दिखता, तो उनका गुस्सा सिर्फ मतदान तक सीमित न रहकर सड़कों पर विद्रोह का रूप ले लेता है।

विरोध प्रदर्शनों का नया और व्यापक कैलेंडर

यूरोपीय नेताओं की नींद उड़ चुकी है क्योंकि जनता ने अब बाकायदा विरोध प्रदर्शनों का एक पूरा कैलेंडर ही जारी कर दिया है। आने वाले दिनों में यूरोप के कई बड़े देशों में बड़े पैमाने पर हड़तालों और प्रदर्शनों की तैयारी है:

  • 30 अक्टूबर: पूरे इटली में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की गई है।

  • 31 अक्टूबर: फ्रांस और जर्मनी में जनता सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन करेगी।

  • 5 नवंबर: फ्रांस में एक बार फिर देशव्यापी हड़ताल और मार्च निकाला जाएगा।

  • 11 नवंबर: स्पेन में आवास संकट और आसमान छूते किराए के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरेंगे।

  • 20 नवंबर: इटली में यातायात ठप करने के लिए चक्का जाम हड़ताल का ऐलान किया गया है।

बढ़ता यह जन-आंदोलन यूरोपीय सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है, और हर बीतते दिन के साथ हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं।