Mule Account Scam Patna: बैंक खाता किराए पर देने और फर्जी किट तैयार करने वाले गिरोह का खुलासा, पुलिस ने किया बड़ा पर्दाफाश
साइबर ठगी का नाम आते ही आमतौर पर फर्जी कॉल्स, ओटीपी और मोबाइल हैकिंग जैसी बातें सामने आती हैं, लेकिन बिहार की राजधानी पटना में सामने आए एक अंतरराज्यीय गिरोह का नेटवर्क इससे कहीं अधिक बड़ा और संगठित था। इस गिरोह में ठगी की रकम निकालने, बैंक खाते जुटाने, सुरक्षित ठिकाने की व्यवस्था करने और अन्य राज्यों से युवाओं को बुलाने के लिए बाकायदा अलग-अलग लोग तैनात किए गए थे। किसी को कुल निकासी पर कमीशन मिलता था, तो कुछ युवकों को 15 हजार से 20 हजार रुपये तक मासिक वेतन पर रखा गया था। पटना के अगमकुआं इलाके में सक्रिय इस गिरोह के मास्टरमाइंड राहुल कुमार की गिरफ्तारी के बाद इसके कामकाज और कारनामों से जुड़े कई बड़े खुलासे हुए हैं।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों में साइबर ठगी से हासिल की गई अवैध रकम को एटीएम और चेक के माध्यम से निकालता था। इसके बाद रकम का बंटवारा पहले से तय हिस्सेदारी के आधार पर किया जाता था। मुख्य आरोपी राहुल कुमार कुल निकासी का 20 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था, जबकि शेष रकम जामताड़ा के हैंडलर्स जुबैर और अल्ताफ तक पहुंचाई जाती थी। इसके अलावा, नेटवर्क में सहयोग के लिए कन्हैया कुमार को 5%, जहानाबाद के राजू कुमार को 3% और दिल्ली के कुलदीप सिंह को फ्लैट की व्यवस्था संभालने के बदले 2.5 प्रतिशत कमीशन मिलने की बात सामने आई है।
💰 15 से 20 हजार रुपये की मासिक सैलरी और बैंक किट का काला कारोबार
इस गिरोह की कार्यशैली का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि इसके कई सदस्य कमीशन के बजाय फिक्स सैलरी पर काम करते थे।
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मासिक वेतन वाले गुर्गे: लखनऊ के शिशुपाल सिंह, कोलकाता के राहुल हेला और शादीक आलम, शेखपुरा के धनराज कुमार तथा पटना के विष्णु कुमार को हर महीने 15,000 से 20,000 रुपये तक दिए जाते थे। इनका मुख्य काम एटीएम बूथों से नकदी निकालना, बैंकों से पासबुक व चेकबुक जुटाना और लोगों को झांसा देकर पटना लाना था।
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बैंक किट और म्यूल अकाउंट: गिरोह के लोग आम जनता को खाते खुलवाने के नाम पर मामूली रकम (आमतौर पर 1,000 से 1,500 रुपये) देते थे और उनकी पूरी बैंक किट (पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और लिंक सिम कार्ड) अपने कब्जे में ले लेते थे। आधार कार्ड में पता बदलवाने और मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए भी अलग से भुगतान किया जाता था।
🔗 हरियाणा की जेल से जुड़े तार और पूर्णिया में बड़ा फर्जीवाड़ा
जांच में खुलासा हुआ कि मास्टरमाइंड राहुल कुमार और कुलदीप सिंह की मुलाकात हरियाणा की जेल में हुई थी, जहाँ दोनों पहले भी साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बंद रह चुके थे। जेल से छूटने के बाद उन्होंने फिर से संपर्क साधा और पिछले छह महीनों में पटना के अगमकुआं स्थित शीतलानगर में दो फ्लैट किराए पर लेकर इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
इसी तरह का एक बड़ा मामला पूर्णिया में भी सामने आया है, जहाँ माइक्रोफाइनेंस लोन दिलाने के नाम पर गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें म्यूल अकाउंट (Mule Accounts) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने ऐसे करीब 150 संदिग्ध खातों की पहचान की है और इस सिलसिले में 41 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
विशेष सावधानी: सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या दस्तावेजों से जुड़ा सिम कार्ड बिल्कुल न दें। यदि आपके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों के लेनदेन में होता है, तो आप भी गंभीर कानूनी मुश्किलों और जांच के दायरे में फंस सकते हैं।