Rewari Hospital Death Case: रेवाड़ी में प्रसूता पूनम की मौत मामले में नया मोड़, परिजनों का डॉक्टरों पर गंभीर आरोप
रेवाड़ी शहर के मोहल्ला संघी का बास निवासी पूनम की सिजेरियन डिलीवरी के बाद रविवार देर रात एक निजी अस्पताल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका ने रविवार सुबह करीब 9 बजे एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया था। हालांकि, डिलीवरी के कुछ ही घंटों बाद ब्लीडिंग (खून का रिसाव) शुरू होने पर डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अस्पताल की डॉक्टर ने मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है।
⏰ ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत और परिजनों के आरोप
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बहिन काजल का बयान: मृतका की छोटी बहन काजल ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे डिलीवरी हुई थी और दोपहर करीब 3 बजे तक परिवार को उसकी हालत पूरी तरह ठीक होने की जानकारी दी जा रही थी। इसके बाद अचानक अस्पताल की ओर से बताया गया कि ब्लीडिंग नहीं रुक रही है और दोबारा ऑपरेशन करना पड़ेगा। परिवार के सदस्य बार-बार पूनम की तबीयत के बारे में पूछते रहे, लेकिन उन्हें हर बार सब कुछ सामान्य होने का कहकर टाल दिया गया।
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समय पर जानकारी न देने का आरोप: परिजनों का आरोप है कि दोबारा ऑपरेशन के बाद पूनम को ऑक्सीजन लगाकर नीचे लाया गया, लेकिन उसकी गंभीर हालत के बारे में परिवार को समय पर अवगत नहीं कराया गया। शाम करीब 6 बजे उसे नीचे लाया गया और रात करीब 8 बजे उसकी मौत की सूचना दी गई।
⚖️ पति का बयान: “मुआवजा नहीं, हमें इंसाफ चाहिए”
मृतक पूनम के पति नरेंद्र यादव ने अस्पताल प्रबंधन पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी तरह का मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि अपनी पत्नी के लिए सिर्फ इंसाफ चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पूनम की गंभीर स्थिति के बारे में परिवार को बता दिया जाता, तो वे उसे तुरंत किसी दूसरे बड़े अस्पताल में शिफ्ट करवाने का प्रयास कर सकते थे। उन्होंने डॉक्टर दीप्ति तनेजा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
🩺 डॉक्टर का पक्ष और पुलिस की कार्रवाई
पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए डॉक्टर दीप्ति तनेजा ने बताया कि पूनम पिछले नौ महीने से उनके यहां ही इलाज करा रही थी। उसका पहला बच्चा भी ऑपरेशन से हुआ था, इसलिए इस बार भी सिजेरियन डिलीवरी की गई।
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डॉक्टर के अनुसार, सुबह करीब 8:30 बजे पूनम अस्पताल पहुंची और 9 बजे ऑपरेशन किया गया जो पूरी तरह सफल रहा। नवजात बच्ची का वजन करीब तीन किलो था और दोनों स्वस्थ थीं।
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इसके बाद पूनम को निजी कमरे में शिफ्ट कर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। कुछ समय बाद उसे घबराहट होने लगी और जांच करने पर ब्लीडिंग का पता चला, जिसके बाद तुरंत दोबारा ऑपरेशन किया गया।
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डॉक्टर ने दावा किया कि जब उसे ओटी से शिफ्ट किया जा रहा था, तब उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। पूनम की मौत का मुख्य कारण कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) था, क्योंकि उसे शुरुआत से ही घबराहट हो रही थी।
फिलहाल, शहर थाना पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है और महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।