देश में जारी विरोध प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और देश के आम लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी यह लड़ाई हर हाल में जारी रखेगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने मौजूदा हालात को देश में ‘अघोषित इमरजेंसी’ जैसा करार दिया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पूरे मामले को लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात करेंगे और उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराएंगे।
✉️ मुख्य न्यायाधीश को लिखा गया पत्र, कल होगी मुलाकात
अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बयान जारी करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने और राहुल गांधी ने इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।
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तय कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 12 अक्टूबर 2026 की शाम 4 से 5 बजे के बीच सीजेआई से यह मुलाकात होगी।
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इस दौरान विपक्षी दल अपनी सभी चिंताओं और देश के मौजूदा हालात से मुख्य न्यायाधीश को पूरी तरह रूबरू कराएंगे।
खरगे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष मुख्य न्यायाधीश से कोई अनुचित मांग नहीं कर रहा है, बल्कि वह हाथ जोड़कर अपनी चिंताएं उनके सामने रखेगा और इस मामले में उचित दखल देने की अपील करेगा। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग की भूमिका और देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज है।
🚨 ‘अघोषित इमरजेंसी’ और सुरक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश में आज अघोषित आपातकाल जैसे हालात बना दिए गए हैं, लेकिन विपक्ष इसके खिलाफ अपना संघर्ष लगातार जारी रखेगा।
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सुरक्षा बलों की भारी तैनाती: खरगे ने प्रदर्शन के दौरान की गई सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी बड़े सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान लगभग 32 हजार पुलिसकर्मियों और 7,500 सीआरपीएफ (CRPF) जवानों को तैनात किया गया था, जो युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन को लेकर सरकार के गहरे डर को साफ दर्शाता है।
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सड़कों और नेटवर्क पर रोक: कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान जबरन सड़कों को बंद किया गया, संचार व्यवस्था को बाधित किया गया, एयरपोर्ट तक आम नागरिकों की पहुंच सीमित की गई और कई जगहों पर मोबाइल इंटरनेट नेटवर्क तक बंद कर दिए गए। उनके अनुसार, यह कदम इस बात का सुबूत हैं कि सरकार देश में लोकतांत्रिक तरीके से किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं होने देना चाहती है।