संयुक्त राष्ट्र में गूंजा भारत का कड़ा संदेश: आतंकवाद के खिलाफ कोई ‘गुड’ या ‘बैड’ भेद नहीं होना चाहिए—बिप्लब कुमार देब
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति में भारत की ओर से राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए पश्चिम त्रिपुरा के सांसद एवं त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का अत्यंत स्पष्ट और सख्त रुख दुनिया के सामने रखा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद अपने सभी रूपों में मानवता, अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, आर्थिक प्रगति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है।
बिप्लब कुमार देब ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद संयुक्त राष्ट्र के मूल मूल्यों के पूरी तरह विपरीत है और नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाए जाने को किसी भी परिस्थिति में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक मंच पर ‘गुड टेररिज्म’ और ‘बैड टेररिज्म’ जैसा कोई भेद नहीं होना चाहिए, क्योंकि भारत आतंकवाद के हर कृत्य को मानवता के विरुद्ध एक गंभीर अपराध मानता है।
💻 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों के दुरुपयोग पर चिंता
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने आतंकवादी संगठनों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की।
-
नई चुनौतियां: उन्होंने कहा कि आतंकी संगठन अब युवाओं की भर्ती, कट्टरपंथीकरण, दुष्प्रचार, ऑपरेशनल प्लानिंग और मनी लॉन्ड्रिंग व वित्तपोषण के लिए नई तकनीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
-
वैश्विक पहुंच: इन तकनीकों की वैश्विक पहुंच और गुमनामी के कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, जिससे कमजोर युवा आसानी से उनके निशाने पर आ रहे हैं।
📜 CCIT को शीघ्र पूरा करने की मांग और पहलगाम हमले का उल्लेख
-
व्यापक कन्वेंशन (CCIT): भारत की तरफ से बोलते हुए उन्होंने ‘Comprehensive Convention on International Terrorism’ (CCIT) को शीघ्र अंतिम रूप दिए जाने की पुरजोर मांग की। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1996 में भारत द्वारा इसका मसौदा पेश किए जाने के बावजूद वैश्विक आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन का अभाव अभी भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की एक बड़ी कमी है।
-
पहलगाम हमला: देब ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि इस घटना ने आतंकवाद की भारी मानवीय कीमत को एक बार फिर उजागर किया है। उन्होंने सीमा पार से आतंकवाद को मिलने वाले संरक्षण और सेफ गाहों पर भी तीखा प्रहार किया।
🛡️ आतंकवाद के खिलाफ भारत की छह प्रमुख प्राथमिकताएं
बिप्लब कुमार देब ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से निपटने के लिए भारत की ओर से छह स्पष्ट प्राथमिकताएं रखीं:
-
आतंकवाद के खिलाफ अपनाए जाने वाले दोहरे मानदंडों को पूरी तरह समाप्त करना।
-
आतंकवादियों, उनके संरक्षकों, फाइनेंसरों और प्रायोजकों की कड़ी जवाबदेही तय करना।
-
आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Funding) पर पूरी तरह रोक लगाना।
-
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करना।
-
उभरती हुई नई तकनीकों के आतंकवादी दुरुपयोग पर अंकुश लगाना।
-
आतंकवाद के पीड़ितों को हमेशा केंद्र में रखना तथा वैचारिक और अनुकूल परिस्थितियों का मुकाबला करना।
🇮🇳 OIC और पाकिस्तान को दिया करारा जवाब
संबोधन के अंत में उन्होंने ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) और पाकिस्तान की टिप्पणियों का कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में चल रहे आतंकी ढांचे के खिलाफ भारत की कार्रवाई पूरी तरह केंद्रित और मापी हुई है। भारत को अपनी संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने OIC की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों की दयनीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए और दुनिया से मिलकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई करने का आह्वान किया।