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Jharkhand Competitive Exams Update: परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत सुधार की मांग, जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने दी आंदोलन की चेतावनी

झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर राज्य सरकार को विभिन्न गंभीर मुद्दों पर कटघरे में खड़ा किया है। मंच के सदस्यों ने कहा कि सरकार की ओर से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कार्यप्रणाली में सुधार लाने और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित किए जाने का वादा किया गया था। हालांकि, इस घोषणा को बीते हुए करीब दो महीने का लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन धरातल पर इस दिशा में अब तक कोई भी ठोस और स्पष्ट कदम नहीं उठाया गया है।

⏳ दो महीने बीतने के बाद भी नहीं बनी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली कमेटी, छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग

रिफॉर्म मंच की प्रमुख सदस्य अर्चना कुमारी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की ओर से यह घोषणा की गई थी कि वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक सुधार समिति का गठन किया जाएगा और इस कमेटी में योग्य छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि छात्रों की वास्तविक समस्याओं को रखा जा सके। मंच का गंभीर आरोप है कि इस बड़ी घोषणा के बाद दो महीने से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन आज तक न तो कमेटी का औपचारिक गठन हुआ है और न ही इस संबंध में कोई प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ी है।

⚖️ केवल अभ्यर्थियों पर कार्रवाई से नहीं सुधरेगी व्यवस्था, संस्थागत स्तर पर कड़े कदम उठाने की जरूरत

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंच ने जेपीएससी की परीक्षा व्यवस्था और पूर्व में सामने आए तमाम विवादों को भी जोरदार तरीके से उठाया। सदस्यों ने कहा कि लगातार परीक्षा प्रक्रियाओं में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें कुछ अभ्यर्थियों पर कार्रवाई भी हुई है और कुछ आरोपी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे हैं। इसके बावजूद परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई जा रही है। मंच का स्पष्ट मत है कि केवल आम छात्रों या अभ्यर्थियों पर कार्रवाई करने से परीक्षा व्यवस्था की कमियां दूर नहीं होंगी, बल्कि इसके लिए पारदर्शी संस्थागत बदलाव और जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।

📋 जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच की प्रमुख मांगें और सरकार को अल्टीमेटम

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंच की ओर से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं:

  • रिफॉर्म कमेटी की जो घोषणा की गई थी, वह आज तक अस्तित्व में नहीं आ पाई है, जिसे तत्काल अमलीजामा पहनाया जाए।

  • भविष्य में परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसके लिए व्यापक सुधार की नितांत आवश्यकता है।

  • रिफॉर्म कमेटी का गठन यथाशीघ्र किया जाए तथा उसमें विभिन्न छात्र प्रतिनिधियों को शामिल कर एक ऐसी पारदर्शी नियुक्ति हो जो देश के लिए मिसाल बने।

  • सभी नियुक्तियों के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए और खाली पड़े पदों पर सुधार के बाद तुरंत नया कैलेंडर जारी कर समय पर रिजल्ट और नियुक्तियां दी जाएं।

  • जेएसएससी और जेपीएससी के सभी पदों को रिवाइज़ करते हुए एक महीने के भीतर फ्रेश, बेदाग और गैर-राजनीतिक लोगों की नियुक्ति की जाए।

  • विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े सभी पदों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक रूप से जारी किया जाए।

मंच ने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार का रवैया ऐसा ही सुस्त रहा और सुधार की दिशा में त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में राज्य के युवा और छात्र एक बार फिर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। अभ्यर्थियों के बीच बढ़ रहे असंतोष को देखते हुए सरकार को समय रहते पारदर्शी पहल करनी चाहिए।