Maharashtra Farmer News: पुणे में किसान ने दिवंगत बैल ‘शाहिर’ की मूर्ति स्थापित कर पेश की अनूठी मिसाल, इलाके में हो रही है चर्चा
आज भी देश के कई ग्रामीण इलाकों में ऐसे किसान हैं, जो बैलों के जरिए अपने खेतों की जुताई करते हैं। किसान का उसके बैल के साथ एक बहुत ही गहरा और प्यारा रिश्ता होता है। कई किसान अपने बैल को परिवार के किसी सदस्य या बच्चे की तरह पालते हैं। वे खुद भोजन करने से पहले अपने बैल के चारे-पानी का पूरा ध्यान रखते हैं। किसान और बैल के बीच इस अटूट संबंध की एक बेहद भावुक कर देने वाली तस्वीर महाराष्ट्र के पुणे से सामने आई है। यहां एक किसान के प्रिय बैल की मृत्यु हो गई, तो उसने उसकी याद में अपने घर के आंगन में बैल की एक भव्य प्रतिमा स्थापित करवा दी है।
🌾 विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद कराई गई शाहिर बैल की प्रतिमा की स्थापना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुणे जिले के भोर तालुका स्थित उतरौली गांव के रहने वाले किसान और बैलगाड़ी मालिक अजय विट्ठल शिवतारे के चहेते बैल ‘शाहिर’ की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी। किसान ने इस बैल को अपने बेटे की तरह पाला-पोसा था। बैल की मौत के बाद उसकी अनमोल यादों को हमेशा के लिए सहेजने के वास्ते किसान ने अपने घर के आंगन में उसकी प्रतिमा स्थापित करवाई है। अजय विट्ठल शिवतारे ने पंचक्रोशी के तमाम किसानों, पुणे और सतारा जिले के अन्य बैलगाड़ी मालिकों की उपस्थिति में बैल की मृत्यु के बाद पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कराई और फिर प्रतिमा की स्थापना की।
🍲 बैलों के प्रति अटूट प्रेम: तेरहवीं पर 13 बैलों को परोसा गया नैवेद्य और लोगों का सम्मान
जिस तरह किसी इंसान के निधन के बाद उसकी तेरहवीं और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, बिल्कुल उसी परंपरा का पालन करते हुए किसान अजय विट्ठल शिवतारे ने 13 बैलों को विशेष रूप से ‘रनपोली’ का नैवेद्य परोसा। इसके साथ ही कार्यक्रम में शामिल हुए अन्य बैलगाड़ी मालिकों और मेहमानों को भी सम्मानित किया गया। आज भोर तालुका में किसान अजय विट्ठल शिवतारे और उनके बैल के बीच के इस आत्मीय प्रेम की खूब चर्चा हो रही है। ग्रामीण और आसपास के लोग किसान के इस संवेदनशील कार्य की दिल से सराहना कर रहे हैं।
📸 प्रतिमा देखने और तस्वीरें लेने दूर-दूर से पहुंच रहे हैं लोग
किसान अजय विट्ठल शिवतारे द्वारा अपने घर के आंगन में स्थापित कराई गई इस अनोखी प्रतिमा को देखने और उसकी तस्वीरें व वीडियो लेने के लिए अब दूर-दराज के गांवों से भी लोग उतरौली गांव पहुंचने लगे हैं। एक मूक जानवर के प्रति इतना गहरा अपनत्व और सम्मान दिखाने वाले किसान की यह कहानी अब पूरे इलाके में एक मिसाल बन चुकी है, जो इंसान और पशु के बीच के अटूट रिश्ते को बयां करती है।