Sukhdev Bhagat Raipur Visit: बीजेपी सरकार के वादों और कार्यशैली पर कांग्रेस का कड़ा प्रहार, 2028 चुनाव की रणनीति का किया ऐलान
रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी एवं सांसद सुखदेव भगत ने प्रदेश में अपनी पहली आधिकारिक पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्र और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार पर तीखे जुबानी हमले किए। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), हसदेव अरण्य की जंगलों की कटाई, आदिवासी अधिकार, खनिज संपदा का दोहन, रोजगार के संकट, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और किसानों से जुड़े तमाम अहम मुद्दों पर सरकार से सीधे जवाब मांगे। श्री भगत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी विकास कार्य के खिलाफ नहीं है, लेकिन विकास की इस पूरी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी आदिवासियों, मेहनतकश किसानों और प्रदेश के युवाओं के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🗳️ चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर खड़े किए गंभीर सवाल, श्वेत पत्र जारी करने की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुखदेव भगत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया कि वर्तमान में चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग किसी सरकारी विभाग की तरह काम कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक श्वेत पत्र (White Paper) तुरंत जारी किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि देश की जनता का चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर पूरा भरोसा बना रहे।
🔍 SIR और मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर भाजपा पर किया कड़ा पलटवार
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी ‘SIR’ के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रभारी ने भाजपा द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठाते हैं, तो उसका जवाब अक्सर राजनीतिक दल यानी भाजपा की तरफ से सामने आता है। कांग्रेस ने मांग की कि SIR की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से जितने भी नाम काटे गए हैं, उन सभी की विधानसभा-वार विस्तृत सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यह भी पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए कि हटाए गए नामों में गरीब परिवारों, प्रवासी मजदूरों और आदिवासी वर्ग के लोगों की संख्या कितनी है।
🌿 हसदेव अरण्य और खनन गतिविधियों पर सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
प्रदेश के चर्चित हसदेव अरण्य क्षेत्र और अन्य इलाकों में धड़ल्ले से चल रही खनन गतिविधियों को लेकर कांग्रेस ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सुखदेव भगत ने आरोप लगाया कि अंधाधुंध जंगलों की कटाई और विभिन्न खनन परियोजनाओं को मंजूरी देते समय स्थानीय निवासियों और ग्राम सभाओं की आपत्तियों एवं चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ के इन विशाल जंगलों और बेशकीमती खनिज संसाधनों से जो भारी-भरकम आर्थिक लाभ हो रहा है, उसमें आखिर स्थानीय आदिवासियों और विस्थापित परिवारों की वास्तविक हिस्सेदारी कितनी है? कांग्रेस ने इस क्षेत्र की अद्वितीय जैव विविधता और दुर्लभ औषधीय संपदा को बचाने की पुरजोर वकालत की।
📜 जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी अधिकारों और PESA कानून के प्रभावी पालन की मांग
कांग्रेस प्रभारी ने आदिवासियों के परंपरागत जल, जंगल और जमीन से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पेसा (PESA) कानून और वन अधिकार अधिनियम का राज्य में कड़ाई से पालन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टों के जितने भी आवेदन लंबे समय से लंबित हैं या खारिज कर दिए गए हैं, उनकी मौजूदा स्थिति को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जंगल केवल आदिवासियों के लिए आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
💰 DMF फंड के उपयोग और बस्तरिया विकास के मॉडल पर सवाल
जिला खनिज न्यास (DMF) फंड की राशि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि खनन प्रभावित जिलों में मिलने वाले इस भारी-भरकम राजस्व का वास्तविक फायदा वहां के आम लोगों को कितना मिल रहा है, इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के वास्तविक विकास का आकलन करने की बात कही गई।
🎓 युवा बेरोजगारी और PLFS रिपोर्ट का हवाला देकर सरकार से मांगा रोजगार का रोडमैप
प्रदेश में बढ़ती युवा बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेरते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ का युवा सिर्फ कागजी रोजगार मेलों और झूठी घोषणाओं से काम नहीं चलाना चाहता, बल्कि उसे पक्की नौकरियां चाहिए। कांग्रेस ने पीएलएफएस (PLFS) की वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर बढ़कर 6.1 प्रतिशत हो गई है, इसलिए सरकार को तुरंत एक स्पष्ट भर्ती कैलेंडर जारी करना चाहिए।
🎯 2028 के चुनावी लक्ष्य और जनता के मुद्दों पर सड़क से सदन तक संघर्ष का ऐलान
अंत में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य केवल आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि गांधीवादी विचारों के अनुरूप जनता के असल मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक एक मजबूत और प्रभावी लड़ाई लड़ना है।