DUSU Election 2026: निर्दलीय उपाध्यक्ष बने दीपांशु शौकीन से कांग्रेस या NSUI ने नहीं किया संपर्क, इंटरव्यू में किया बड़ा खुलासा
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर चर्चा में आए दीपांशु शौकीन और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के बीच दूरियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एबीवीपी के उम्मीदवार को हराकर उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने वाले 21 वर्षीय दीपांशु की जीत की तस्वीर शनिवार दोपहर तक पूरी तरह साफ हो चुकी थी, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कांग्रेस या एनएसयूआई के किसी भी बड़े नेता ने उनसे संपर्क नहीं किया है। खुद दीपांशु ने एक इंटरव्यू में इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें अभी तक किसी का फोन नहीं आया है।
🛑 2. टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल, दीपांशु बोले— ‘चार साल के संघर्ष के बाद भी पार्टी ने नहीं समझा, आंतरिक राजनीति का होना पड़ा शिकार’
एबीवीपी के ईशु मौर्य को 13,705 के बड़े अंतर से हराने वाले दीपांशु की जीत के बाद से ही एनएसयूआई के टिकट वितरण पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा यहां तक है कि खुद राहुल गांधी भी उनका टिकट काटे जाने को लेकर नाराज थे। जब दीपांशु से यह पूछा गया कि उनका टिकट किसने और क्यों कटवाया, तो उन्होंने किसी का सीधा नाम तो नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि उनके साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वे पिछले चार साल से डीयू में लगातार संघर्ष कर रहे थे और छात्रों का समर्थन उनके साथ था, लेकिन अंदरूनी राजनीति के चलते उन्हें दरकिनार कर दिया गया।
🚗 3. कंडक्टर पिता और आशा वर्कर मां के बेटे हैं दीपांशु, कहा— ‘गाड़ियां और पैसा न होने के कारण भी काटा जा सकता है टिकट’
साक्षात्कार के दौरान दीपांशु ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उनसे अक्सर यह कहा जाता था कि उनके साथ बड़ी गाड़ियां नहीं दिखतीं और उनके पास पैसा नहीं है, इसलिए वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। उन्होंने आशंका जताई कि टिकट कटने की एक बड़ी वजह यह भी हो सकती है। एक साधारण परिवार (कंडक्टर पिता और आशा वर्कर मां) से ताल्लुक रखने वाले दीपांशु की इस बेबाक टिप्पणी के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी जमीनी और आम कार्यकर्ताओं की मेहनत को नजरअंदाज कर रही है।