ब्रेकिंग
Yamunanagar Firing Case: यमुनानगर में हाइड्रा और क्रेन ऑफिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग, एक शख्स की मौत और ... DU DUSU Election 2026 Counting News: डूसू चुनाव में वीडियोग्राफी के बीच वोटों की गिनती जारी; विजय जु... Inspirational Story: गाजियाबाद का घरौंदा बाल आश्रम बना मिसाल; 100 बच्चे जा चुके विदेश, 1000 को मिला ... Yuvraj Manchanda Case: शादी की शॉपिंग के बाद लापता हुए युवराज का नाले में मिला शव; करोड़ों के पैसों ... Delhi Moti Nagar News: मोती नगर में सिलेंडर धमाके से ढहा ग्राउंड फ्लोर; दमकल की गाड़ियों ने पाया आग ... Delhi Crime News: बीयर पिलाकर नाबालिग से दरिंदगी, फिर चाकू से गोदा; दिल्ली के स्वरूप नगर में दिल दहल... Gwalior News: घटिया सड़क निर्माण पर ग्वालियर हाई कोर्ट सख्त; चेतकपुरी चौपाटी रोड की रिपोर्ट में भ्रष... Bhopal Laxmi Pujan: भोपाल में महाराष्ट्रीयन परिवारों के घर विराजीं ज्येष्ठ और कनिष्ठ गौरी; महाभोग मे... Rahul Gandhi Indore Visit Controversy: राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले पोस्टर वॉर; 'झूठ की गूंज' क... Rahul Gandhi Indore Visit: राहुल गांधी का इंदौर दौरा; 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में जेन-जी और युवा...

Radha Ashtami 2026 Date and Shubh Muhurat: कब है राधा अष्टमी? जानिए सही तिथि, पूजा मुहूर्त और श्रीकृष्ण पूजा में महत्व

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जहां कान्हा का जन्मोत्सव यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है, वहीं इसके ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी के आशीर्वाद के बिना न तो भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और न ही भक्ति का पूरा फल प्राप्त होता है. पंचांग के अनुसार, इस साल राधा अष्टमी का यह पावन पर्व 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा.

⏰ 2. राधा अष्टमी 2026 तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त, जानिए कब शुरू होगी अष्टमी तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे शुरू होगी और इसका समापन 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे होगा. उदया तिथि के नियमानुसार राधा अष्टमी 19 सितंबर को ही मनाई जाएगी. इस दिन पूजा का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा, जिसमें भक्त विधि-विधान से राधा रानी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

📅 3. जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद ही क्यों आती है राधा अष्टमी? जानिए दोनों पर्वों का अनूठा संबंध

राधा अष्टमी और जन्माष्टमी के बीच का अंतर केवल तिथियों का संयोग नहीं है, बल्कि दोनों पर्व एक ही पक्ष की अष्टमी से जुड़े हैं. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था, जबकि इसके ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा रानी प्रकट हुई थीं. यही वजह है कि जन्माष्टमी कृष्ण पक्ष और राधा अष्टमी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, जिससे दोनों के बीच 15 दिनों का अंतर होता है.

🏛️ 4. कौन हैं राधा रानी और कृष्ण की पूजा उनके बिना क्यों मानी जाती है अधूरी?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी का जन्म ब्रज के बरसाना में हुआ था, जहाँ उनके पिता का नाम वृषभानु और माता का नाम कीर्ति देवी है. हिंदू धर्म में राधा-कृष्ण को एक-दूसरे का पूरक माना गया है. मान्यता है कि राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की आंतरिक शक्ति और सर्वोच्च भक्ति का प्रतीक हैं. यही कारण है कि मंदिरों में हमेशा ‘राधे-कृष्ण’ पुकारा जाता है और बिना राधा रानी की आराधना के कान्हा की पूजा अधूरी मानी जाती है.