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सिरदर्द या जोड़ों के दर्द में बार-बार दवा लेना घातक, नेफ्रोलॉजिस्ट से जानें कैसे फेल होती है किडनी

नई दिल्ली: सिरदर्द हो, कमर दर्द या फिर घुटनों और जोड़ों की तकलीफ—आजकल अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे तुरंत आराम पाने के लिए पेन किलर (दर्द निवारक दवा) का सेवन कर लेते हैं।

समस्या तब गंभीर रूप धारण कर लेती है जब दर्द से राहत पाने के लिए इन गोलियों का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा और बिना चिकित्सीय परामर्श के बार-बार होने लगता है। तात्कालिक रूप से दर्द भले ही गायब हो जाए, लेकिन लंबे समय तक इन दवाओं का अनियंत्रित सेवन किडनी की कार्यप्रणाली को अंदर ही अंदर खोखला कर सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पेन किलर से किडनी को होने वाला शुरुआती नुकसान ‘साइलेंट किलर’ की तरह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता रहता है।

यशोदा मेडिसिटी के नेफ्रोलॉजी एंड रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. एल. के. झा के अनुसार, क्लिनिकल प्रैक्टिस में अक्सर ऐसे मरीज सामने आते हैं जिनकी किडनियां नियमित रूप से पेन किलर लेने की आदत के कारण डैमेज हो चुकी होती हैं। लोग किसी पुराने पर्चे के आधार पर वर्षों तक खुद ही दवाएं खरीदते और खाते रहते हैं, जो बेहद खतरनाक साबित होता है।

🩺 पेन किलर कैसे पहुंचाती है किडनी को नुकसान? इन मरीजों को है सबसे ज्यादा खतरा

दवाओं का दुष्प्रभाव और संवेदनशील वर्ग:

  • रक्त प्रवाह पर बुरा असर: डॉ. झा के अनुसार, नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) श्रेणी की कई पेन किलर्स किडनी में होने वाले जरूरी ब्लड फ्लो (रक्त संचार) को बाधित कर देती हैं। लगातार इस्तेमाल से नेफ्रॉन्स की फिल्टर करने की क्षमता घटने लगती है।

  • डायबिटीज और हाई बीपी के मरीज: शुगर और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों की किडनियों पर पहले से ही अतिरिक्त दबाव होता है। ऐसे में पेन किलर का सेवन किडनी फेलियर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

  • बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग: उम्रदराज व्यक्तियों और पहले से किडनी की हल्की-फुल्की समस्या झेल रहे मरीजों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के दर्द की कोई भी गोली नहीं लेनी चाहिए।

💧 शरीर में पानी की कमी (Dehydration) होने पर और अधिक बढ़ जाता है जोखिम

यशोदा मेडिसिटी के सीनियर कंसल्टेंट की चेतावनी:

  • डिहाइड्रेशन में घातक प्रभाव: यशोदा मेडिसिटी के सीनियर कंसल्टेंट (नेफ्रोलॉजी एंड रीनल ट्रांसप्लांट) डॉ. प्रजीत मजुमदार बताते हैं कि यदि शरीर में पानी की कमी है, तो पेन किलर का असर किडनी के लिए और अधिक विषैला हो जाता है।

  • उल्टी, दस्त और बुखार में परहेज: तेज बुखार, डायरिया या पर्याप्त पानी न पीने की स्थिति में दर्द निवारक दवाएं लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दौरान किडनी तक पर्याप्त तरल नहीं पहुंचता और दवा के तत्व सीधे टॉक्सिसिटी पैदा करते हैं।

🧪 शुरुआती दौर में नहीं दिखते लक्षण: रूटीन टेस्ट में क्रिएटिनिन बढ़ने पर होता है खुलासा

लक्षणों का भ्रम और जांच की अहमियत:

  • बिना लक्षण बढ़ता है नुकसान: किडनी की कार्यक्षमता जब तक 50 से 60 प्रतिशत तक कम नहीं हो जाती, तब तक शरीर में कोई खास बाहरी लक्षण नजर नहीं आते।

  • रूटीन जांच में पकड़: कई मामलों में मरीज को तब पता चलता है जब वह किसी अन्य बीमारी के लिए रूटीन ब्लड टेस्ट कराता है और सीरम क्रिएटिनिन व यूरिया का स्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ा हुआ मिलता है।

  • सुरक्षा का भ्रम न पालें: दर्द न होने या कोई परेशानी महसूस न होने का यह कतई मतलब नहीं है कि दवा आपकी किडनी को नुकसान नहीं पहुंचा रही है।

🛑 दर्द दबाने के बजाय असली वजह का इलाज जरूरी: डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें दवा

नेफ्रोलॉजिस्ट्स की महत्वपूर्ण सलाह:

  • रूट कॉज का पता लगाएं: डॉ. झा का कहना है कि कभी-कभार आपात स्थिति में एक गोली लेना अलग बात है, परंतु यदि आपको बार-बार या रोज पेन किलर की जरूरत पड़ रही है, तो दवा से दर्द दबाने के बजाय संबंधित विशेषज्ञ से मिलकर दर्द के मूल कारण (जैसे गठिया, डिस्क, माइग्रेन आदि) का उपचार कराएं।

  • डोज़ और समय सीमा का निर्धारण: मरीज की उम्र, वजन और समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर केवल डॉक्टर ही यह निर्धारित कर सकते हैं कि कौन सी दवा, किस मात्रा में और कितने दिनों तक सुरक्षित रूप से ली जा सकती है।