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‘नक्सल पीड़ित ग्रामीण भी शहीद से कम नहीं’: सुकमा पहुंचे डॉ. प्रेमा साईं महाराज ने जाना परिवारों का दर्द

सुकमा (छत्तीसगढ़): एक ओर जहां शासन-प्रशासन हथियार त्यागकर मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए योजनाएं चला रहा है, वहीं दशकों से नक्सली हिंसा का दंश झेल रहे निर्दोष ग्रामीणों की सुध लेना भी अत्यंत आवश्यक है।

वे ग्रामीण जिन्होंने नक्सलियों के बिछाए आईईडी (IED) विस्फोटों को झेला, किसी ने अपने परिजनों को खो दिया तो किसी ने हमेशा के लिए अपने अंग गंवा दिए, उनकी सहायता करना समाज का परम कर्तव्य है। यह विचार मां मातंगी धाम के पीठाधीश डॉ. प्रेमा साईं महाराज ने व्यक्त किए। वे सुकमा जिले के सुदूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र भीमापुरम और बैनपल्ली पहुंचे तथा पीड़ित परिवारों से प्रत्यक्ष भेंट की।

🦿 IED ब्लास्ट में पैर गंवाने वाली मडकम सुक्की को ₹51 हजार की तत्कालिक सहायता

भीमापुरम में सुक्की से मुलाकात और सहायता:

  • हादसे का दर्द: 26 मई 2024 को भीमापुरम निवासी मडकम सुक्की जंगल में वनोपज एकत्र करने गई थी, जहां वह नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर आईईडी की चपेट में आ गई। इस भयानक विस्फोट में उसका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था।

  • इलाज व कृत्रिम पैर: शासन-प्रशासन के सहयोग से रायपुर में उसका उपचार कराया गया और कृत्रिम पैर लगाया गया।

  • पारिवारिक संघर्ष: सुक्की के माता-पिता का 5-6 वर्ष पूर्व ही गंभीर बीमारी से देहांत हो चुका था, जिससे वह अकेले संघर्ष कर रही थी।

  • राहत सामग्री वितरण: डॉ. प्रेमा साईं महाराज ने सुक्की को ₹51,000 की नकद आर्थिक सहायता प्रदान की और परिवार के लिए राशन सामग्री, बच्चों हेतु कॉपी-किताबें, स्कूल बैग, पेन तथा परिवारजनों को कपड़े-साड़ियां व चप्पलें भेंट कीं।

💰 प्रति माह ₹31 हजार की नियमित पेंशन और सरकारी नौकरी दिलाने का संकल्प

दीर्घकालिक सहायता की बड़ी घोषणा:

  • मासिक आर्थिक संबल: परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए डॉ. प्रेमा साईं महाराज ने घोषणा की कि वे धाम में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दानराशि से सुक्की को प्रति माह ₹31,000 की नियमित आर्थिक सहायता देंगे ताकि उसका जीवनयापन सुगम हो सके।

  • रोजगार की पहल: उन्होंने आश्वस्त किया कि वे प्रदेश के मुख्यमंत्री से चर्चा कर सुक्की को चतुर्थ श्रेणी (Class-4) अथवा योग्यतानुसार सरकारी सेवा में समायोजित कराने का पुरजोर प्रयास करेंगे।

💔 बैनपल्ली के मुचाकी किशोर से मिले: पिता की हत्या के बाद झेला मानसिक व आर्थिक संकट

जागरगुड़ा क्षेत्र के पीड़ित परिवार की व्यथा:

  • पिता का साया उठा: महाराज इसके बाद बैनपल्ली पहुंचे और मुचाकी किशोर के परिजनों से मिले। नक्सलियों ने किशोर के पिता को घर से खींचकर बेरहमी से मार डाला था।

  • मानसिक आघात: पिता की नृशंस हत्या के सदमे से मां का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और पूरे परिवार के भरण-पोषण का भार अकेले किशोर के कंधों पर आ गया।

  • गुमनाम पीड़ितों की खोज: महाराज ने कहा कि बस्तर के जंगलों में ऐसे अनगिनत परिवार गुमनामी में संघर्ष कर रहे हैं, जिनकी वास्तविक पीड़ा समझने के लिए जमीनी स्तर पर पहुंचना जरूरी है।

🚩 ‘सरेंडर करने वालों के साथ निर्दोष पीड़ितों को भी मिले सम्मान’: दिव्य दरबार की यादें

पुनर्वास नीति और बस्तर की शांति पर विचार:

  • दूरस्थ अंचलों में दिव्य दरबार: डॉ. प्रेमा साईं महाराज ने उल्लेख किया कि नक्सल आतंक के चरम दौर में भी उन्होंने सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के अंदरूनी क्षेत्रों में दिव्य दरबार लगाकर शांति का संदेश दिया था।

  • निर्णायक बदलाव: उन्होंने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़ पर है। सरेंडर करने वालों के पुनर्वास के साथ-साथ उन निर्दोष ग्रामीणों को कभी विस्मृत नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने देश और समाज के लिए अपनी देह और परिजनों का बलिदान दिया है।