देश में सामान्य से 12% कम बरसा मानसून: एल नीनो का असर, बिहार और पंजाब समेत कई राज्यों में गहराया जल संकट
चंडीगढ़: इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने की आशंका अब आधिकारिक आंकड़ों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा पूर्व में जताए गए पूर्वानुमानों के अनुरूप वर्तमान मानसून सीजन में देशभर में सामान्य से 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। उत्तर भारत के राज्यों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। 5 अगस्त तक हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली उपखंड में सामान्य से 26 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई, जबकि पंजाब में बारिश की यह कमी 33 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
🏛️ लोकसभा में उठा मानसून का मुद्दा, केंद्रीय मंत्री ने साझा किए आंकड़े
कुरुक्षेत्र से लोकसभा सांसद नवीन जिंदल द्वारा संसद में पूछे गए सवाल के लिखित उत्तर में केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के विभिन्न मौसम उपखंडों में वर्षा वितरण के आधिकारिक आंकड़े पेश किए।
आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में मानसून का वितरण असमान रहा है और कई प्रमुख कृषि प्रधान क्षेत्रों में बारिश का घाटा काफी बढ़ गया है, जिससे खरीफ फसलों और भूजल स्तर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
📉 IMD का पूर्वानुमान हुआ सही, कमजोर शुरुआत ने बढ़ाईं मुश्किलें
मौसम विभाग ने अप्रैल में ही दीर्घावधि औसत (LPA) के 90 से 92 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान व्यक्त किया था।
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जून का सूखा: जून माह में देशभर में सामान्य से लगभग 35 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी और करीब 70 प्रतिशत जिले बारिश की कमी वाली श्रेणी में रहे।
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जुलाई में आंशिक सुधार: मध्य भारत में अच्छी वर्षा के चलते जुलाई में राष्ट्रीय औसत सुधरा, लेकिन इसके बावजूद जुलाई के अंत तक देश के 47 प्रतिशत जिले कम या बहुत कम वर्षा के दायरे में रहे।
🌊 अल नीनो (El Niño) के प्रभाव से बिगड़ा मानसूनी हवाओं का संतुलन
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, प्रशांत महासागर में विकसित हुए मध्यम तीव्रता के ‘अल नीनो’ प्रभाव ने वर्षा के सामान्य पैटर्न को प्रभावित किया है।
अल नीनो के कारण मानसूनी हवाओं की निरंतरता बाधित हुई, जिससे कई क्षेत्रों में बारिश के बीच लंबा सूखा अंतराल (Dry Spell) देखने को मिला। कहीं-कहीं कम समय में अत्यधिक बारिश हुई, जिससे सतह पर पानी का ठहराव तो हुआ लेकिन मिट्टी की गहराई तक जरूरी नमी नहीं पहुंच सकी।
🌾 पंजाब और हरियाणा में 26 से 33% तक घाटा, कृषि क्षेत्र पर दबाव
उत्तर-पश्चिम भारत के प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी का सीधा असर देखने को मिल रहा है:
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पंजाब: 33% की भारी कमी ने नहरी और नलकूप आधारित सिंचाई पर अत्यधिक दबाव बढ़ा दिया है।
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हरियाणा-दिल्ली: 26% की कमी के चलते किसानों को अतिरिक्त लागत लगाकर फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
📊 बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भी 30% से अधिक बारिश की कमी
देश के 16 मौसम उपखंडों में 5 अगस्त तक 20 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है:
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बिहार: सबसे अधिक 38% वर्षा की कमी
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अरुणाचल प्रदेश: 36% की कमी
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असम-मेघालय व तटीय आंध्र प्रदेश: 35-35% की कमी
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लक्षद्वीप व पंजाब: 33-33% की कमी
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रायलसीमा: 32% तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश व झारखंड में 30-30% की कमी दर्ज हुई।
⏳ वितरण की असमानता बनी बड़ी चुनौती, अब शेष सीजन से राहत की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के लिए नियमित अंतराल पर वर्षा का होना आवश्यक है।
लंबे सूखे अंतराल के बाद तेज बारिश होने से जलभराव और फसल बर्बादी का खतरा रहता है। हालांकि, मानसून का सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है। अगस्त के शेष दिनों और सितंबर माह में संभावित वर्षा से इस घाटे में सुधार होने और कृषि क्षेत्र को आवश्यक राहत मिलने की उम्मीदें टिकी हुई हैं।