दुमका पुलिस लाइन का 170 साल पुराना इतिहास: 1855 में अंग्रेजों ने बनाई थी बैरक, अब 15 अगस्त पर राज्यपाल फहराएंगे तिरंगा
दुमका (झारखंड): झारखंड राज्य के गठन के उपरांत जब दुमका को प्रदेश की उपराजधानी का गौरव प्राप्त हुआ, तब से यहां एक विशिष्ट और गौरवमयी लोकतांत्रिक परंपरा अनवरत चली आ रही है।
इस परंपरा के तहत प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) पर राज्य के मुख्यमंत्री और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर राज्य के राज्यपाल दुमका में राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। यह मुख्य राजकीय समारोह प्रतिवर्ष दुमका स्थित ऐतिहासिक पुलिस लाइन मैदान में पूरे सम्मान और भव्यता के साथ आयोजित किया जाता है।
🏛️ 1855 में संथाल परगना जिला बनने के साथ स्थापित हुई थी ऐतिहासिक पुलिस लाइन
यदि दुमका के इस पुलिस लाइन मैदान के अतीत पर दृष्टि डालें, तो इसका इतिहास लगभग 170 वर्ष पुराना और ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है।
दुमका के वरिष्ठ पत्रकार और व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता शिवशंकर चौधरी के अनुसार, 1855 के ऐतिहासिक संथाल हूल (विद्रोह) के बाद प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ब्रिटिश हुकूमत ने भागलपुर और बीरभूम जिलों के कुछ भू-भागों को अलग कर संथाल परगना जिले का गठन किया था, जिसका प्रशासनिक मुख्यालय दुमका को बनाया गया। इसके उपरांत स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए उपायुक्त (DC) का पद सृजित कर सुरक्षा व्यवस्था के लिए व्यापक पुलिस बल की तैनाती की गई।
🏕️ कुसुमडीह जोरिया के समीप बनाई गई थी छावनी, अंग्रेजों के जमाने की बैरकें आज भी मौजूद
दूर-दराज से आने वाले सुरक्षा बलों और सैन्य टुकड़ियों को आवासीय सुविधा और प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने दुमका शहर के रिहायशी इलाके से लगभग 2 किलोमीटर दूर कुसुमडीह जोरिया (छोटी नदी) के तट पर इस पुलिस लाइन की स्थापना की थी।
सैनिकों के रहने के लिए मजबूत बैरकों और फायरिंग रेंज का निर्माण कराया गया था, जिनमें से कुछ ऐतिहासिक बैरकें आज भी अपने मूल स्वरूप में मौजूद हैं। सैन्य दृष्टि से अंग्रेज शासक इसी पुलिस लाइन से पूरे संथाल परगना प्रमंडल की सुरक्षा और रणनीतियों को नियंत्रित करते थे।
🎖️ आजादी के बाद शुरू हुआ प्रशासनिक उत्सवों का दौर, झांकियां बनीं मुख्य आकर्षण
1947 में देश की आजादी के पश्चात इस पुलिस लाइन मैदान का स्वरूप बदला और यह राष्ट्रीय पर्वों का प्रमुख केंद्र बन गया।
प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी और 15 अगस्त को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में यहां भव्य झंडोत्तोलन, अनुशासित परेड, खेलकूद प्रतियोगिताएं और सरकारी विभागों की जनकल्याणकारी झांकियां निकालने की परंपरा शुरू हुई। इन आयोजनों ने नई पीढ़ी और स्कूली बच्चों में देशभक्ति व राष्ट्रीय चेतना का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🚩 2001 में पूर्व CM बाबूलाल मरांडी ने की थी घोषणा, पहली बार फहराया था तिरंगा
15 नवंबर 2000 को जब झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब दुमका के तत्कालीन सांसद बाबूलाल मरांडी को नवनिर्मित राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनने का ऐतिहासिक गौरव प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बाबूलाल मरांडी ने वर्ष 2001 में दुमका को झारखंड की उपराजधानी घोषित किया। इसके साथ ही उन्होंने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया कि प्रत्येक 26 जनवरी को राज्य के मुख्यमंत्री और 15 अगस्त को राज्यपाल दुमका में ध्वजारोहण करेंगे। 26 जनवरी 2001 को मुख्यमंत्री के रूप में बाबूलाल मरांडी ने इसी पुलिस लाइन मैदान में पहली बार तिरंगा फहराकर इस परंपरा का विधिवत शुभारंभ किया था।
🕊️ 15 अगस्त को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे ध्वजारोहण, तैयारियां पूरी
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार इसी ऐतिहासिक पुलिस लाइन मैदान में प्रातः मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और संयुक्त परेड की सलामी लेंगे।
इस राजकीय आयोजन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पूरे मैदान को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा गणमान्य अतिथियों और आम नागरिकों के बैठने के लिए सुव्यवस्थित वाटरप्रूफ शेड व दर्शक दीर्घा का निर्माण पूरा कर लिया गया है।