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छतरपुर में पहली ही बारिश में बहा ₹3.66 करोड़ का पुल, आधा दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूटा

छतरपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की पोल खोलता एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। चंदला थाना क्षेत्र अंतर्गत करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पुल का एक बड़ा हिस्सा मानसून की पहली ही बारिश में बह गया। पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण बस्तियों का जिला मुख्यालय और मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस आपदा के कारण स्कूली विद्यार्थियों, किसानों और सामान्य ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अब स्थानीय लोग बैलगाड़ियों और कच्चे जोखिम भरे रास्तों से यात्रा करने को विवश हैं।

🌊 उमरी नाले पर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बनवाया था पुल, भ्रष्टाचार की खुली पोल

यह गंभीर प्रकरण जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित चंदला थाना क्षेत्र का है।

यहाँ चंदला, बंसिया, गौहानी मार्ग पर उमरी नाले के ऊपर लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा पुल का निर्माण कराया गया था। तेज बारिश के जलभराव को यह नवनिर्मित पुल सहन नहीं कर सका और इसका एक बड़ा हिस्सा टूटकर बह गया। मुख्य मार्ग से संपर्क कटने से क्षेत्रीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

🚑 मरीजों को खाट पर ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने घटिया निर्माण सामग्री पर उठाए सवाल

स्थानीय किसान रमेश पटेल ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, “बड़ी मुश्किलों और लंबे इंतजार के बाद इस पुल का निर्माण हुआ था, किंतु घटिया सामग्री के प्रयोग के कारण यह पहली बारिश में ही ढह गया। इससे जुड़गुड़ू, बल्दूपुरा, बिहारगंज, गोविंदपुरा, मकारी और सिमरिया सहित कई गांवों का रास्ता बंद हो गया है। लोग जान हथेली पर रखकर उफनते नाले को पार कर रहे हैं और गंभीर मरीजों को खाट पर लादकर ले जाना पड़ रहा है।”

🏗️ 8 माह पूर्व बना था पुल, ₹3.66 करोड़ की सड़क व पुल निर्माण परियोजना

उल्लेखनीय है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा जुड़गुड़ू-विहारगंज मार्ग पर करीब 3 किलोमीटर लंबी सड़क और पुल निर्माण परियोजना स्वीकृत की गई थी।

पुल का निर्माण लगभग 8 माह पूर्व ही पूर्ण कर लिया गया था, जबकि पहुँच मार्ग (सड़क) का कार्य पिछले कई महीनों से जारी था। इस संपूर्ण निर्माण कार्य की स्वीकृत लागत ₹3 करोड़ 66.94 लाख थी, जिसका ठेका एक निजी कंस्ट्रक्शन एजेंसी को सौंपा गया था। पहली ही मूसलाधार वर्षा ने ठेकेदार और विभागीय निगरानी के दावों की हवा निकाल दी है।

🧹 ठेकेदार ने रातों-रात हटाया मलबा, PWD EE ने दिए जांच के आदेश

घटना के उपरांत ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय निवासी बलदा अनुरागी ने बताया कि, “पुल के ध्वस्त होने के तुरंत बाद ठेकेदार ने साक्ष्य मिटाने की नीयत से रातों-रात मलबा हटाकर सफाई कर दी, किंतु ग्रामीण लगातार परेशान हो रहे हैं।” इस संबंध में छतरपुर PWD के कार्यपालन यंत्री (EE) आशीष भारती ने बताया कि, “अलाइनमेंट की तकनीकी कमी के कारण पूर्व से ही कार्य में सुधार की प्रक्रिया चल रही थी। घटिया निर्माण और पुल के ढहने की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी व विभागीय कार्रवाई होगी।”