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नाग पंचमी 2026: सावन सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग! जानें नाग देवता की पूजा की परंपरा और कथा

पवित्र सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ कई धार्मिक पर्वों, व्रतों और पौराणिक कथाओं से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। इसी मास में नाग पंचमी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की विधिवत पूजा-अर्चना करने का विधान है। नाग पंचमी का स्मरण आते ही भगवान शिव के कंठ में विराजमान वासुकि नाग और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग पर विजय प्राप्त करने की अलौकिक कथा भी याद आती है। विशेष रूप से बाल गोपाल श्रीकृष्ण और कालिया नाग की यह कथा नाग पूजा की सनातन परंपरा से जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण पौराणिक कथा मानी जाती है।

📅 कब मनाई जाएगी नाग पंचमी 2026? जानें तिथि और शुभ मुहूर्त का समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, नाग पंचमी का त्यौहार प्रतिवर्ष सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

वर्ष 2026 में पंचमी तिथि 16 अगस्त की सायंकाल 4 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और 17 अगस्त 2026 की सायंकाल 5:00 बजे तक विद्यमान रहेगी। उदयातिथि के आधार पर नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त 2026, सोमवार को श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा।

🐍 आखिर कौन था विषधर कालिया नाग? जिसने दूषित कर दिया था यमुना का जल

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कालिया नाम का एक अत्यंत विशालकाय और अति-विषाक्त नाग अपनी पत्नियों सहित यमुना नदी के गहरे जल में आकर रहने लगा था।

उसके भयंकर विष का प्रभाव इतना तीव्र था कि यमुना जी का निर्मल जल पूरी तरह विषैला और काला पड़ गया था। उसके आसपास का संपूर्ण वातावरण दूषित हो गया था, जिससे गोकुल और वृंदावन के पशु-पक्षी तथा क्षेत्रवासी त्रस्त थे। कालिया नाग के भय से लोग यमुना तट पर जाने से कतराते थे और वह संपूर्ण गोकुलवासियों के लिए एक अत्यंत चिंता का कारण बन चुका था।

🪔 बाल श्रीकृष्ण ने कैसे तोड़ा कालिया नाग का अहंकार? फनों पर किया था दिव्य नृत्य

एक दिन बाल श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ यमुना तट पर गेंद खेल रहे थे।

क्रीड़ा के दौरान गेंद उछलकर यमुना नदी के गहरे जल में चली गई। श्रीकृष्ण उस गेंद को निकालने के उद्देश्य से बिना किसी भय के यमुना जी में कूद गए। नदी की गहराई में पहुंचते ही उनका सामना क्रोधित कालिया नाग से हुआ। कालिया नाग ने अपने विशाल फन और शरीर से श्रीकृष्ण को पूरी तरह जकड़ने का प्रयास किया, किंतु प्रभु ने सहजता से स्वयं को उसके बंधन से मुक्त कर लिया। इसके उपरांत श्रीकृष्ण कालिया नाग के विशाल फनों पर आरूढ़ हो गए और उस पर दिव्य नृत्य करने लगे। श्रीकृष्ण के चरण प्रहारों से कालिया नाग लहूलुहान और अशक्त होने लगा।

🙏 नागपत्नियों ने मांगी प्रभु से क्षमा, श्रीकृष्ण ने दिया कालिया नाग को अभयदान

जब कालिया नाग पूर्णतः पराजित होकर मृत्यु के निकट पहुँच गया, तब उसकी पत्नियां (नागपत्नियां) भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष प्रकट हुईं।

उन्होंने अश्रुपूर्ण नेत्रों से श्रीकृष्ण की स्तुति की और कालिया नाग के प्राणों की रक्षा हेतु क्षमा याचना की। भक्तवत्सल श्रीकृष्ण ने नागपत्नियों की अनुनय-विनय स्वीकार कर ली। उन्होंने कालिया नाग को यमुना का तट छोड़कर रसातल/समुद्र में प्रस्थान करने का आदेश दिया। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने कालिया नाग को यह अभयदान भी दिया कि उनके चरण चिह्नों के उसके फन पर अंकित होने के कारण गरुड़ देव अब उसे कभी क्षति नहीं पहुंचाएंगे।

🌊 नाग पंचमी से कालिया नाग की कथा का क्या है धार्मिक संबंध?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी का सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा यमुना नदी में कालिया नाग के अहंकार का मर्दन करने और पर्यावरण को विषमुक्त करने की इस पौराणिक घटना से है।

इसी ऐतिहासिक व धार्मिक प्रसंग के प्रतीक स्वरूप नागों के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और उनके संरक्षण का संदेश देने के लिए यह पर्व सदियों से मनाया जा रहा है।

🥛 नाग पंचमी पर क्यों होती है नाग देवता की पूजा? जानें धार्मिक मान्यताएं

नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से चली आ रही है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन सर्प देव की विधि-विधान से पूजा करने से वंश वृद्धि होती है तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। साथ ही कुंडली के कालसर्प दोष से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन कई स्थानों पर नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या बांबी पर दूध और दूर्वा अर्पित करने की परंपरा का पालन किया जाता है।

✨ नाग पंचमी 2026 क्यों है अत्यंत खास? सावन सोमवार का बन रहा है दुर्लभ संयोग

वर्ष 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को पड़ रही है।

सावन मास के सोमवार के साथ नाग पंचमी तिथि का यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी माना जा रहा है। सोमवार का दिन स्वयं देवाधिदेव महादेव को समर्पित है और नाग देव उनके आभूषण हैं। अतः शिव भक्त इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने के साथ-साथ नाग देवता का पूजन कर अक्षय पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।