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सहारनपुर: 4 करोड़ के मकान का थमाया 22 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स! 12 करोड़ वाटर टैक्स का नोटिस देख उड़े सपा नेता के होश

सहारनपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के सहारनपुर नगर निगम की टैक्स निर्धारण प्रणाली का एक अत्यंत चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। वार्ड नंबर-2 के रामनगर स्थित मल्हीपुर रोड निवासी समाजवादी पार्टी (सपा) नेता फरहाद गाड़ा के परिवार को नगर निगम की ओर से जीआईएस (GIS) सर्वे के आधार पर एक ऐसा प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस थमाया गया है, जिसे देखकर परिवार स्तब्ध रह गया। इस सरकारी नोटिस में मकान के वास्तविक बाजार मूल्य से कई गुना अधिक हाउस टैक्स (गृह कर) और जलकर (वाटर टैक्स) का बकाया दर्शाया गया है।

🏠 816 गज में बने मकान की कीमत 4 करोड़, नगर निगम ने थमाया ₹22 करोड़ का नोटिस

सपा नेता फरहाद गाड़ा के अनुसार, उनकी कोठी लगभग 816 वर्ग गज में बनी हुई है, जिसका निर्माण करीब दो वर्ष पूर्व कराया गया था।

उनका परिवार पिछले एक वर्ष से इसमें निवास कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके इस मकान का बाजार मूल्य लगभग 4 करोड़ रुपये है, किंतु नगर निगम की ओर से प्रेषित नोटिस में 22 करोड़ रुपये से अधिक का संपत्ति कर (Property Tax) निर्धारित कर दिया गया है। इतनी भारी-भरकम टैक्स राशि का नोटिस देखकर समूचा परिवार मानसिक सदमे में आ गया है।

🚰 12 करोड़ रुपये का लगाया वाटर टैक्स, परिवार ने अव्यावहारिक दावों पर उठाए सवाल

हैरानी की बात यह है कि इस नोटिस में हाउस टैक्स के साथ-साथ 12 करोड़ रुपये का वाटर टैक्स (जलकर) भी जोड़ दिया गया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि यह टैक्स आकलन पूरी तरह अव्यावहारिक, तर्कहीन और तथ्यहीन है। एक आम आवासीय परिवार द्वारा अपने जीवनकाल में इतनी विशाल राशि का पानी इस्तेमाल करना व्यावहारिक रूप से संभव ही नहीं है।

⚖️ “लापरवाही का खामियाजा हम क्यों भुगतें?”— पीड़ित परिवार ने दी अदालत जाने की चेतावनी

नोटिस प्राप्त होने के तुरंत बाद पीड़ित परिजनों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।

परिवार का गंभीर आरोप है कि नगर निगम की घोर लापरवाही और डेटा एंट्री (Data Entry) में हुई गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। परिजनों ने कहा कि जीवनभर की गाढ़ी कमाई से बनाए गए मकान पर उसकी मूल कीमत से कई गुना अधिक टैक्स का नोटिस थमाना बेहद गंभीर प्रशासनिक चूक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस भारी त्रुटि को शीघ्र सुधारा नहीं गया, तो वे न्याय हेतु अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

💻 नगर निगम ने दी सफाई— “प्रथम दृष्टया टाइपिंग या डेटा एंट्री की मिस्टेक, जांच जारी”

इस पूरे प्रशासनिक विवाद पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक रूप से यह मामला टाइपिंग या डेटा एंट्री की तकनीकी त्रुटि प्रतीत होता है।

अधिकारियों के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित संपत्ति के रिकॉर्ड की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। यदि जांच में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो उसे तत्काल संशोधित किया जाएगा। हालांकि, पीड़ित परिवार का स्पष्ट कहना है कि इतनी बड़ी लापरवाही को केवल “टाइपिंग मिस्टेक” बताकर इतिश्री नहीं की जा सकती।

🔎 नगर निगम की GIS सर्वे प्रणाली और कर निर्धारण प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इस बहुचर्चित घटनाक्रम के बाद सहारनपुर नगर निगम की जीआईएस (GIS) सर्वे प्रणाली, कर निर्धारण की पारदर्शी प्रक्रिया और विभागीय रिकॉर्ड की शुद्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डेटा प्रविष्टि में इतनी विशाल गड़बड़ी हो सकती है, तो शहर की अन्य संपत्तियों के टैक्स निर्धारण पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर निगम प्रशासन इस त्रुटि को कब तक सुधारता है और पीड़ित परिवार को राहत प्रदान करता है।