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बिहार बांकीपुर उपचुनाव: जाति-पाति से ऊपर उठकर जन सुराज को वोट, जानें क्यों हारी भाजपा और कैसे काम कर गए PK के मुद्दे

पटना (बिहार): तीन दशक (30 वर्ष) के लंबे अंतराल के पश्चात भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उसके पारंपरिक और अभेद्य गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में करारी हार का सामना करना पड़ा है।

बिहार में बदलाव की ऐसी तीव्र बयार चली कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गृह क्षेत्र बांकीपुर ही ढह गया। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर पहली बार चुनावी मैदान में उतरी प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भाजपा को प्रत्यक्ष शिकस्त दी है।

💥 एक सीट के उपचुनाव की गूंज पटना से दिल्ली तक, भाजपा का पूरा शीर्ष नेतृत्व कैंप करने के बावजूद रहा नाकाम

बिहार की एकमात्र बांकीपुर विधानसभा सीट पर आयोजित इस उपचुनाव में भाजपा की पराजय की गूंज पटना के राजनीतिक गलियारों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है।

इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कई केंद्रीय मंत्रियों तथा संपूर्ण बिहार कैबिनेट ने बांकीपुर में लगातार कैंप किया, किंतु शीर्ष नेतृत्व की भारी-भरकम मौजूदगी के बावजूद भाजपा अपनी सीट बचाने में पूरी तरह विफल रही।

🗳️ पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर ने बिगाड़ा भाजपा का गणित, विपक्ष के वैक्यूम का मिला सीधा लाभ

राजनीति के नए प्रयोगों के बीच पहली बार सीधे चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर (PK) ने भाजपा को उसी के गढ़ में पराजित कर दिया।

यद्यपि यह मात्र एक सीट का उपचुनाव था, किंतु जन सुराज की इस जीत को सत्ताधारी गठबंधन के प्रति जनता के आक्रोश की स्पष्ट अभिव्यक्ति माना जा रहा है। चुनाव के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस गौण दिखाई दी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का पारंपरिक वोट बैंक भी दरक गया। अंतिम दिनों में तेजस्वी यादव के मैदान में उतरने के बावजूद मुस्लिम और यादव मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग प्रशांत किशोर के पक्ष में लामबंद हो गया।

📉 नीट आंदोलन, भरत तिवारी एनकाउंटर और यूजीसी विवाद का दिखा नकारात्मक असर

बांकीपुर में भाजपा की इस बड़ी हार के पीछे कई महत्वपूर्ण स्थानीय व नीतिगत कारण उभरकर सामने आए हैं—

  • छात्रों में भारी आक्रोश: नीट (NEET) पेपर लीक और उसके बाद हुए देशव्यापी छात्र आंदोलनों का चुनाव परिणाम पर गहरा असर पड़ा। इसके अतिरिक्त यूजीसी (UGC) नियमों को लेकर अगड़ी जातियों के युवाओं में व्याप्त नाराजगी भी मतदान में साफ दिखाई दी।

  • भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: भरत तिवारी के विवादित एनकाउंटर को लेकर जनता के एक बड़े वर्ग में गहरा असंतोष था, जिसने सम्राट चौधरी नीत राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े किए।

  • जनता से जुड़े जमीनी मुद्दे: प्रशांत किशोर लगातार शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों पर जोर देते रहे, जिससे युवाओं और आम नागरिकों का सीधा जुड़ाव हुआ।

🛑 जाति-पाति का समीकरण ध्वस्त, कमजोर उम्मीदवार और ओवर-कॉन्फिडेंस पड़ी भाजपा पर भारी

बिहार की पारंपरिक राजनीति के विपरीत बांकीपुर में पहली बार जाति-पाति के समीकरण पूरी तरह ध्वस्त नजर आए और मतदाताओं ने विकास व बदलाव के नाम पर मतदान किया।

दूसरी ओर, भाजपा में प्रत्याशी चयन को लेकर शुरुआती असमंजस और अंततः कमजोर उम्मीदवार उतारना उसके लिए घातक सिद्ध हुआ। प्रशांत किशोर मतदाताओं को यह समझाने में सफल रहे कि भाजपा किसी को भी टिकट देकर चुनाव नहीं जीता सकती। अंततः, भाजपा का अति-आत्मविश्वास (Over Confidence) ही बांकीपुर के उसके ऐतिहासिक किले के ढहने का सबसे प्रमुख कारण बन गया।