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नेपाल के पीएम बालेन शाह की मनमानी पर बवाल! राष्ट्रपति से बनाई दूरी, जजों पर इस्तीफे का दबाव बनाने का लगा आरोप

काठमांडू (नेपाल): प्रधानमंत्री बालेन शाह जब से नेपाल की बागडोर संभाले हैं, तब से वे अपने सख्त और अप्रत्याशित फैसलों से देश चला रहे हैं।

रैपर से राजनेता और फिर सीधे प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाले बालेन शाह न तो वहां के राष्ट्रपति से कोई संवैधानिक सलाह ले रहे हैं और न ही नेपाली सुप्रीम कोर्ट की दशकों पुरानी परंपराओं का पालन कर रहे हैं। इसको लेकर विपक्षी नेताओं में खासा आक्रोश और नाराजगी है। इसके अतिरिक्त उन पर सुप्रीम कोर्ट में सीधा दखल देने और तीन से अधिक वरिष्ठ जजों पर इस्तीफे का अनैतिक दबाव बनाने का भी आरोप है। बालेन शाह पर ये गंभीर आरोप अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने लगाए हैं।

🏛️ राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से बनाई दूरी, 70 साल पुरानी राजनयिक परंपराओं को भी बदला

नेपाल के संसदीय लोकतंत्र में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच निरंतर संवाद एक पुरानी और महत्वपूर्ण संवैधानिक परंपरा रही है, लेकिन बालेन शाह इसकी लगातार अनदेखी कर रहे हैं।

पदभार संभालने के चार महीने बीत जाने के बाद भी उन्होंने शीतल निवास (नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल का आधिकारिक आवास) से दूरी बना रखी है। अब दोनों के बीच सिर्फ आधिकारिक कार्यक्रमों में ही औपचारिक मुलाकात होती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री शाह ने राष्ट्रपति से कोई व्यक्तिगत या प्रशासनिक बैठक नहीं की है। कैबिनेट के फैसलों को राष्ट्रपति भवन पहुंचाने के लिए वे खुद जाने के बजाय मुख्य सचिव स्तर के अफसरों को भेजते हैं। शीतल निवास के अधिकारी इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सीधा उल्लंघन मान रहे हैं। वहीं उन्होंने विदेशी राजदूतों से अकेले में मिलने की परंपरा को खत्म कर सभी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें करने की नई नीति अपनाई है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों पर इस्तीफे का दबाव, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच के आरोप

एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने बालेन शाह सरकार पर नेपाल की स्वतंत्र न्यायपालिका पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

इन संगठनों का कहना है कि प्रधानमंत्री जजों पर जबरन इस्तीफे का दबाव बना रहे हैं और अदालती कार्यवाही को प्रभावित कर रहे हैं। बालेन शाह सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के तीन वरिष्ठ जजों—सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर पद छोड़ने का दबाव बनाने के आरोप हैं। इसके अलावा नेपाली सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में भी 70 साल पुरानी परंपरा को दरकिनार कर दिया गया, जहां सबसे वरिष्ठ जज को चीफ जस्टिस बनाया जाता था। एक्टिंग चीफ जस्टिस सपना प्रधान मल्ला की संवैधानिक परिषद से सिफारिश न किए जाने पर बालेन शाह ने तर्क दिया था कि पदों पर केवल योग्यता के आधार पर नियुक्तियां होनी चाहिए, परंपरा के आधार पर नहीं।

🔥 युवाओं के बीच बालेन शाह की तगड़ी साख: केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी और वीआईपी कल्चर पर लगाया बैन

इन तमाम विवादों के बावजूद नेपाल के युवाओं और आम जनता के बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह की लोकप्रियता उनके कड़े फैसलों के कारण काफी ज्यादा बनी हुई है।

पद संभालते ही उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवाकर नेपाल की पूरी सियासत में हड़कंप मचा दिया था। उन्होंने सरकारी दफ्तरों से वीआईपी (VIP) कल्चर को पूरी तरह समाप्त कर दिया और वहां से राजनेताओं की तस्वीरें हटवा दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में छात्र राजनीति पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का कड़ा आदेश जारी किया तथा पारंपरिक मीडिया के बजाय सीधे सोशल मीडिया को जनता से संवाद का जरिया बनाया।