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नाग पंचमी पर क्यों चढ़ाया जाता है नाग देवता को दूध? जानिए धार्मिक मान्यता और शास्त्रों का सच

हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ‘नाग पंचमी’ का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

यह पर्व पूरी तरह से नाग देवता को समर्पित है। इस शुभ तिथि पर विधि-विधान से नाग देव की पूजा-अर्चना की जाती है। नाग पंचमी के दिन पूजन करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा। विशेष बात यह है कि इस दिन सावन का तीसरा सोमवार है और साथ ही सूर्य संक्रांति का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है।

🥛 नाग पंचमी पर क्यों प्रचलित है नागों को दूध चढ़ाने की परंपरा? जानिए इसके पीछे की वजह

नाग पंचमी के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में नागों को दूध चढ़ाने की परंपरा काफी समय से चली आ रही है।

हालांकि, अक्सर श्रद्धालुओं और लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि आखिर नाग पंचमी के दिन नागों को दूध क्यों चढ़ाया जाता है? क्या इस परंपरा का कोई विशेष धार्मिक या पौराणिक कारण है? नागों को दूध अर्पित करने को लेकर धर्म शास्त्रों में क्या निर्देश दिए गए हैं? आइए इन सभी पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।

🔱 भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं नाग देवता, वासुकी नाग को धारण करने से जुड़ा है धार्मिक महत्व

पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देव भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं।

भगवान भोलेनाथ ने स्वयं अपने गले में वासुकी नाग को आभूषण की भांति धारण किया हुआ है। शिवजी के गले में सुशोभित वासुकी नाग को शक्ति, संरक्षण, उर्वरता और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि नाग पंचमी के पावन दिन श्रद्धालु जल, दूध, हल्दी, अक्षत, कुशा और पुष्प से नाग देवता का अभिषेक करते हैं तथा उनकी षोडशोपचार पूजा करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पूरे परिवार पर नाग देवता की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

📜 धर्म शास्त्रों में क्या है उल्लेख? शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का विधान, जीवित सांप को दूध पिलाने से बचें

धर्म शास्त्रों में नाग पूजन का महत्व तो विस्तार से बताया गया है, परंतु किसी जीवित सर्प (सांप) को दूध पिलाने का कोई प्रत्यक्ष विधान नहीं मिलता है।

अनेक विद्वानों व ज्योतिषाचार्यों का मत है कि मूल रूप से नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या फिर शिवलिंग पर लिपटे नाग स्वरूप का दूध व जल से अभिषेक करने की परंपरा है। दूसरी ओर, वन्यजीव विशेषज्ञों और सर्प विशेषज्ञों के अनुसार, सांप प्राकृतिक रूप से दूध नहीं पीते हैं क्योंकि वे विशुद्ध मांसाहारी जीव हैं। अत्यधिक प्यास या डिहाइड्रेशन की स्थिति में सांप दूध जैसा तरल पदार्थ पी तो लेते हैं, लेकिन दूध उनके पाचन तंत्र के लिए नुकसानदायक होता है। इसलिए नाग पंचमी के अवसर पर जीवित सांप को दूध पिलाने के बजाय शिवलिंग या नाग प्रतिमा पर दूध अर्पित करना ही शास्त्रसम्मत है।