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एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान ‘मनुस्मृति’ टिप्पणी पर राज्यसभा में हंगामा, खरगे का बयान रिकॉर्ड से हटाया गया

नई दिल्ली: संसद के उच्च सदन राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान उस समय तीखा हंगामा देखने को मिला, जब कांग्रेस अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘मनुस्मृति’ से जुड़ा एक बयान दिया।

राज्यसभा सभापति ने खरगे को बीच में टोकते हुए सवाल किया कि आखिर मनुस्मृति का इस पेपर लीक बिल से क्या सीधा संबंध है। सत्ता पक्ष (बीजेपी) ने खरगे की इस टिप्पणी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। नेता सदन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि खरगे का यह बयान पूरी तरह तथ्यों से परे है और इससे समाज में अनावश्यक अशांति फैलेगी। भारी हंगामे और सत्ता पक्ष के कड़े ऐतराज के बाद सभापति ने खरगे की मनुस्मृति वाली टिप्पणी को सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने (एक्सपंज करने) की घोषणा कर दी।

📜 जेपी नड्डा का पलटवार: “मनुस्मृति का ओरिजिनल टेक्स्ट ऑथेंटिकेट करें, ऐसे बयानों से फैलती है भ्रम की स्थिति”

बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया था कि नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और सिलेबस में मनुस्मृति की चीजें शामिल की जा रही हैं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा, “विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने जो दावा किया है, वह मेरी जानकारी में तथ्यों से पूरी तरह परे है। वे मनुस्मृति के ओरिजिनल टेक्स्ट को सदन के पटल पर ऑथेंटिकेट करें।” उन्होंने ब्रिटिश काल से पहले के प्रामाणिक संदर्भों की मांग करते हुए दोहराया कि बिना तथ्यों के इस तरह की बयानबाजी करने से जनमानस में असंतोष और अशांति पैदा होती है।

📚 बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने दिए ऐतिहासिक ग्रंथ व किताबों के रिफरेंस, प्रमोद तिवारी ने भी रखी अपनी बात

इस संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए बीजेपी सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज विलियम जोंस और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की रचनाओं का हवाला दिया।

उन्होंने कई अन्य ऐतिहासिक पुस्तकों का संदर्भ देते हुए कहा कि इसीलिए वे विपक्षी सदस्यों से इस बयान को ऑथेंटिकेट करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एक पुस्तक को कोट करते हुए कहा कि यह किताब बीजेपी के ही शासनकाल में प्रकाशित हुई है और इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। तिवारी के इस दावे पर नड्डा ने पुनः स्पष्ट किया कि केवल प्रामाणिक और मूल ऐतिहासिक साक्ष्यों को ही आधार माना जाना चाहिए।

🏛️ राज्यसभा में बोले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह: “UPA के अधूरे एजेंडे और NTA के विचार को NDA ने किया पूरा”

उधर, पेपर लीक बिल और भर्ती प्रक्रियाओं पर बोलते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में मुख्य रूप से चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां कार्य कर रही हैं—यूपएससी (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और आईबीपीएस (IBPS)।

उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षाओं के लिए अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कार्यरत है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि एक एकीकृत राष्ट्रीय एजेंसी (NTA) बनाने का पहला सुझाव वर्ष 1992 में कांग्रेस सरकार के समय आया था और 2010 में UPA काल की समिति ने भी इसकी सिफारिश की थी। जितेंद्र सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्ष को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करनी चाहिए कि UPA के उस अधूरे पड़े काम और एजेंडे को NDA सरकार ने धरातल पर उतारकर पूरा किया है।