ब्रेकिंग
लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी पास हुआ 'एंटी पेपर लीक बिल', राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून जोशीमठ के किमाणा गांव में भू-धंसाव से हड़कंप! चंडिका माता मंदिर क्षतिग्रस्त, प्राथमिक विद्यालय और पं... दिल्ली सरकार की बड़ी पहल: 'विद्या वाहिनी' योजना के तहत 1.40 लाख छात्राओं को मिलेगी मुफ्त साइकिल! CM ... 'Idiots' और 'Andhbhakts' टिप्पणी पर घिरे राहुल गांधी: अनुराग ठाकुर ने विशेषाधिकार समिति को मामला भेज... हरियाणा मतदाता सूची पुनरीक्षण: 26.29 लाख वोटरों के रिकॉर्ड में मिलीं गड़बड़ियां, 33 लाख नाम ड्राफ्ट ... समालखा नगर परिषद में सियासी ड्रामे का पटाक्षेप! मनीषा कुहाड़ निर्विरोध बनीं वाइस चेयरपर्सन हरियाणा में JBT शिक्षकों की TGT पदोन्नति प्रक्रिया तेज! 13 अगस्त तक मांगे आवेदन, DEEO पर गाज की तैया... ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा का धमाकेदार प्रदर्शन, जैवलिन थ्रो के फाइनल मे... पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धारा 24(2) का सहारा लेकर नहीं खोले जा सकते दशकों पुराने भू... राज्यसभा में उठी गुरुग्राम में हाईकोर्ट सर्किट बेंच की मांग! सांसद संजय भाटिया ने 'टॉवर ऑफ जस्टिस' क...

कैथल में धान की फसल पर ‘फिजी वायरस’ का खतरनाक हमला! 1,500 एकड़ फसल तबाह, बौने रह गए पौधे

कैथल/चंडीगढ़: हरियाणा के अन्नदाता किसानों पर एक बार फिर गंभीर प्राकृतिक और जैविक संकट मंडराने लगा है। प्रदेश के कैथल जिला सहित कई प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में ‘फिजी वायरस’ (Southern Rice Black-streaked Dwarf Virus) का प्रकोप बेहद तेजी से फैल रहा है।

इस जानलेवा वायरस के भीषण हमले से अकेले कैथल और आसपास के कई इलाकों में करीब 1,500 एकड़ से अधिक रकबे में खड़ी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। खेतों में पौधे पूरी तरह बौने रह गए हैं और उनमें बालियां नहीं निकल पा रही हैं, जिसके कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

🐛 ‘सफेद पीठ वाले तेले’ से फैल रहा है वायरस, पौधे बौने होकर समय से पहले ही जा रहे सूख

कृषि वैज्ञानिकों और कीट विशेषज्ञों के अनुसार, यह फिजी वायरस मुख्य रूप से ‘व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर’ (सफेद पीठ वाले तेले) नामक कीट के माध्यम से एक खेत से दूसरे खेत में तेजी से फैलता है।

इस वायरस से संक्रमित धान के पौधे अपनी सामान्य शारीरिक लंबाई नहीं पकड़ पाते और बौने (Dwarf) ही रह जाते हैं। इसके साथ ही पौधों की जड़ें काली पड़ जाती हैं और उनमें बालियां नहीं निकलतीं। बालियां न बनने के कारण पूरी फसल पकने से पहले ही सूखकर पूरी तरह नष्ट हो जाती है।

🌾 किसानों ने सरकार से की तुरंत विशेष गिरदावरी और मुआवजे की मांग, HAU के वैज्ञानिकों ने संभाला मोर्चा

धान की लहलहाती फसल आंखों के सामने बर्बाद होने से आक्रोशित और बेहद चिंतित किसानों ने राज्य सरकार से प्रभावित इलाकों में तुरंत विशेष गिरदावरी कराकर उचित आर्थिक मुआवजे की मांग की है।

वहीं, मामला शासन और प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद कृषि विभाग और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के कृषि वैज्ञानिकों की संयुक्त टीमों ने प्रभावित खेतों का धरातलीय दौरा करना शुरू कर दिया है। कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय कृषि विशेषज्ञों के परामर्श से अनुशंसित कीटनाशकों का सही मात्रा में छिड़काव करें।