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बिहार, असम और राजस्थान में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी केस होंगे वापस; CJP प्रवक्ता सौरव दास का बड़ा दावा

नई दिल्ली: देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने एक बड़ा बयान जारी कर जानकारी दी है कि बिहार, असम और राजस्थान सरकारों की ओर से आश्वासन मिला है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) वापस ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इन छात्रों व प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सौरव दास ने देर रात सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बिहार और असम के बाद अब राजस्थान में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की थी, जो दोनों पक्षों के बीच वार्ता में मध्यस्थ (Mediation) की भूमिका निभा रहे थे।

📜 बिहार और असम सरकार ने जारी किया आधिकारिक नोटिफिकेशन, सीजेपी को दी गई कॉपियां

सौरव दास ने बताया कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें बिहार और असम के गृह विभागों द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन की कॉपियां सौंपी हैं। इन नोटिफिकेशन में दर्ज केस वापस लेने, भविष्य में दंडात्मक कार्रवाई न करने और हिरासत या जेल में बंद सभी लोगों को रिहा करने की पूरी गारंटी दी गई है।

उन्होंने केंद्र सरकार और अन्य बीजेपी-एनडीए शासित राज्यों की ओर से भी इस तरह का आधिकारिक गारंटी-नोटिफिकेशन जारी करने के वादे को दोहराया। दास ने कहा कि जो बातें वार्ता के मेज पर तय हुई थीं, वे सभी नोटिफिकेशन में स्पष्ट दर्ज हैं और किसी भी प्रदर्शनकारी को इस कानूनी लड़ाई में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

⚖️ कपिल सिब्बल CJP को देंगे 1 करोड़ रुपये की कानूनी मदद, वकीलों के लिए बनेगा विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म

सीजेपी प्रवक्ता ने बताया कि भविष्य में ऐसी किसी भी आपात स्थिति से निपटने और प्रदर्शनकारियों को तुरंत विधिक सहायता पहुंचाने के लिए एक विशेष वेबसाइट शुरू की जा रही है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देश के अलग-अलग जिलों के वकील स्वेच्छा से जुड़ सकेंगे, जिससे जरूरतमंदों को तुरंत कानूनी मदद मिल सके।

इसी बीच, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस कानूनी नेटवर्क और फंड के लिए 1 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि देने का ऐलान किया है। उन्होंने देश भर के वकीलों से इस लीगल एड फंड में योगदान देने की अपील की है। सौरव दास के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिब्बल ने कहा कि इस पोर्टल पर वकील अपना नाम, शहर और सहायता का प्रकार दर्ज कर सकेंगे। इससे पहले सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने चेतावनी दी थी कि यदि दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

🏛️ बिहार गृह विभाग ने जारी किया रिहाई का आदेश, तेज प्रताप यादव समेत 355 लोगों को मिलेगी राहत

इधर, बिहार सरकार के गृह विभाग ने औपचारिक निर्देश जारी कर गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने तथा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर, शिकायतें और कानूनी नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जारी सरकारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा गया है कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6:00 बजे तक आयोजित आंदोलन से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि बिहार में नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने के आरोप में जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव समेत 355 लोगों को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया था, जिन्हें अब रिहा किया जा रहा है।

📢 37 दिनों के ऐतिहासिक आंदोलन के बाद CJP ने वापस लिया प्रोटेस्ट, मानी गईं दो प्रमुख मांगें

तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद से इस्तीफा देने और सरकार द्वारा दो प्रमुख शर्तों को स्वीकार करने के बाद सीजेपी ने अपना 37 दिन लंबा राष्ट्रव्यापी आंदोलन आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया। सरकार ने सीजेपी की दो मुख्य मांगें स्वीकार की हैं—पहली, आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा देना, और दूसरी, देश भर के प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेना।

उल्लेखनीय है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी ने 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च का आह्वान किया था। इस दौरान पुलिस की नाकेबंदी को तोड़कर आगे बढ़ते छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। लाठीचार्ज में कई छात्रों और पुलिसकर्मियों को चोटें आई थीं, जिसके बाद यह आंदोलन और अधिक उग्र होकर बिहार समेत कई राज्यों में फैल गया था।