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Krishna’s Peacock Feather: भगवान श्रीकृष्ण क्यों लगाते हैं मुकुट में मोर पंख? जानिए त्रेता युग से जुड़ी पौराणिक कथा

द्वापरयुग में जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अपना आठवां अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण सिर पर मुकुट, उसमें लगा मोर पंख, हाथों में बांसुरी और पीतांबर धारण किए हुए ही ज्यादातर तस्वीरों में नजर आते हैं। भक्तों ने भगवान के इस रूप को अपने हृदय में विशेष स्थान दिया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मुकुट में मोर के पंख को ही क्यों स्थान दिया? इसके पीछे राधा रानी के प्रति अटूट प्रेम के साथ-साथ त्रेता युग यानी भगवान श्रीराम के समय की भी एक पौराणिक कथा जुड़ी है।

💖 ब्रज की मान्यताओं में मोर पंख का महत्व

ब्रज की मान्यताओं के अनुसार, मोर का पंख भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दिव्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसमें प्रेम, समर्पण और पवित्रता का भाव निहित है। यही कारण है कि जन्माष्टमी और अन्य त्योहारों में मोर पंख का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर या पूजा स्थान में मोर पंख रखना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर रहती है।

🏹 पौराणिक कथा: श्रीराम और मोर का प्रसंग

मोर के पंख का संबंध भगवान विष्णु के श्रीराम अवतार से भी जुड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम व्याकुलता से प्रकृति और पशु-पक्षियों से सीता जी का पता पूछते हैं। तब एक मोर ने भगवान से कहा कि उसने रावण को माता सीता को ले जाते हुए देखा है और वह उन्हें रास्ता दिखा सकता है, लेकिन उसने शर्त रखी कि प्रभु पैदल चलेंगे और वह उड़कर आगे चलेगा।

✨ भगवान श्रीराम ने दिया था मोर को वचन

ऐसी स्थिति में मोर ने श्रीराम को उपाय बताया कि वह उड़ते हुए अपने पंख जमीन पर गिराता जाएगा, ताकि वे रास्ता न भटकें। मोर आकाश मार्ग से उड़ते हुए अपने पंख गिराने लगा, जिससे उसके पास एक भी पंख नहीं बचा और उसकी मृत्यु निकट आ गई। भगवान श्रीराम उसकी इस गहरी भक्ति और सेवा से अत्यंत प्रसन्न हुए। श्रीराम ने कहा कि वे इस जन्म में इस उपकार का मूल्य नहीं चुका सकते, लेकिन अगले जन्म में मोर के सम्मान के रूप में उसके पंख को अपने मुकुट पर जरूर धारण करेंगे। अपनी इसी प्रतिज्ञा के तहत जब भगवान ने श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया, तो उन्होंने मोर पंख को अपने मुकुट में हमेशा के लिए स्थान दिया।