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उद्यान शाखा भोपाल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025: पौधारोपण कार्यों में भारी वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग टेंडर जारी होने से पहले ही शुरू हो गया था काम; तत्कालीन कार्यपालन यंत्री प्रमोद कुमार मालवीय की भूमिका संदिग्ध

भोपाल। राजधानी भोपाल में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025’ के अंतर्गत उद्यान शाखा द्वारा कराए गए पौधारोपण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। सजग नागरिक और प्रार्थी शाहिद इकबाल ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, भोपाल शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण का जिम्मा राज नर्सरी, नीरज कंस्ट्रक्शन, मंगलनाथ कंस्ट्रक्शन एवं कॉस्मॉस कंस्ट्रक्शन जैसी एजेंसियों को दिया गया था। आरोप है कि कई स्थानों पर कार्य की निविदा (टेंडर) प्रकाशित होने और वर्क ऑर्डर जारी होने से काफी पहले ही काम शुरू कर दिया गया था। कुछ मामलों में तो वर्क ऑर्डर जारी होने से करीब 7 से 15 दिन पूर्व ही काम शुरू पाया गया, जो निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शिकायतकर्ता शाहिद इकबाल ने विशेष रूप से नीरज कंस्ट्रक्शन का उल्लेख करते हुए बताया कि निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले ही कार्य का शुरू होना यह दर्शाता है कि संबंधित ठेकेदारों को पहले से ही कार्य मिलने की पुख्ता जानकारी थी। इसके कारण पूरी निविदा प्रक्रिया को महज एक औपचारिकता बना कर रख दिया गया।
वीआईपी मूवमेंट और भारी सुरक्षा के बीच ‘कागजी’ काम का दावा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के मुख्य दिनों यानी 24 और 25 फरवरी 2025 के दौरान किए गए कार्यों को लेकर हुआ है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन दो दिनों में भोपाल शहर में देश-विदेश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों, राजनेताओं और केंद्रीय मंत्रियों का आगमन हुआ था। वीआईपी मूवमेंट के चलते सुरक्षा के इतने कड़े इंतजाम थे कि पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया था और सड़कों को पूरी तरह से साफ करा दिया गया था। सुरक्षा कारणों से किसी भी आम गाड़ी को रुकने या खड़े होने तक की अनुमति नहीं थी।
हैरत की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में इसी बेहद संवेदनशील अवधि (24 और 25 फरवरी) के दौरान रेतघाट से रोशनपुरा तक के मुख्य वीआईपी रूट पर धड़ल्ले से पौधारोपण कार्य और सामग्री का उपयोग होना दर्शाया गया है। प्रार्थी का कहना है कि जब सुरक्षा घेरे के कारण परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, तो उस विपरीत स्थिति में इस रूट पर भारी काम होना पूरी तरह से काल्पनिक और गलत है, जो सीधे तौर पर कागजी हेरफेर और बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
इसके अलावा, मौके पर किए गए वास्तविक कार्य और सरकारी अभिलेखों में भारी अंतर दिखाई देता है। पौधारोपण कार्यों में उपयोग किए गए पौधों, मजदूरों की संख्या, मिट्टी और खाद की मात्रा को कागजों पर वास्तविक कार्य की तुलना में अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया है, जिससे शासकीय धनराशि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और गबन की आशंका पैदा होती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया, कार्य निष्पादन, माप पुस्तिका (MB), भुगतान और सामग्री उपयोग की एक स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (EE) प्रमोद कुमार मालवीय की भूमिका को अत्यंत संदिग्ध बताया गया है और उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया गया है। शाहिद इकबाल ने दावा किया है कि उनके पास इस भ्रष्टाचार से संबंधित सभी आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें वे जांच के दौरान प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।