ब्रेकिंग
Haryana Government Tenders: 5 करोड़ से अधिक के टेंडरों की जानकारी अब ऑनलाइन; पारदर्शिता के लिए सरकार... Haryana Air Pollution: हरियाणा में 1 अक्टूबर से लागू होगी 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नीति; बिना पॉल्यूश... Yamunanagar News: खाट पर पिता को लेकर न्याय मांगने पहुंचीं बेटियां; अनिल विज से गुहार, पर मंत्री नही... Haryana Health Services: स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार ने दी 18 करोड़ से अधिक की मंजूर... Faridabad Crime News: साली से निकाह का रास्ता साफ करने के लिए पत्नी की हत्या; आरोपी पति गिरफ्तार Haryana LTC Bill Update: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत; अब LTC बिल में संशोधन के लिए नहीं भटकना... Anil Vij Statement: राम मंदिर चढ़ावा मामले पर भड़के अनिल विज; कहा- 'विपक्ष कर रहा सनातन का मजाक' Irrigation Department Action in Yamunanagar: सरकारी जमीन से हटाया अतिक्रमण; नोटिस के बाद भी कब्जा न ... Yamunanagar News: सरकारी काम में बाधा डालने और मारपीट के आरोप में पूर्व सरपंच पिंकी रानी गिरफ्तार Tamar Murder Case: रांची के तमाड़ में बुजुर्ग की हत्या का खुलासा; जमीन विवाद में आरोपी गिरफ्तार

Muharram Tradition: मुहर्रम पर विदिशा की अनूठी विरासत; बिना चंदे के कुशवाहा परिवार खुद उठाता है सवारी का पूरा खर्च

विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा में मुहर्रम का पर्व धार्मिक सीमाओं से आगे निकलकर इंसानियत और आपसी प्रेम की एक शानदार मिसाल पेश करता है। शहर के बड़े बाजार स्थित ‘बावड़ी वाले बाबा’ की सवारी वर्षों से गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बनी हुई है। इस परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक हिंदू कुशवाहा परिवार पिछले पांच दशकों से भी अधिक समय से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभा रहा है।

🕌 साझा विरासत: मजार के सामने बजरंगबली का मंदिर

खाए मोहल्ला स्थित बावड़ी वाले बाबा का स्थान सांप्रदायिक सौहार्द का केंद्र है। मजार के ठीक सामने बजरंगबली का प्राचीन मंदिर स्थित है, जहाँ दोनों धर्मों के लोग बिना किसी भेदभाव के श्रद्धा प्रकट करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यही वह दृश्य है जो विदिशा की साझा संस्कृति को परिभाषित करता है, जहाँ आस्थाएं एक-दूसरे का सम्मान करती हैं।

🕊️ 5 पीढ़ियों का अटूट समर्पण

कुशवाहा परिवार के लिए बाबा की सेवा केवल एक काम नहीं, बल्कि उनका धर्म और अटूट विश्वास है। परिवार की वरिष्ठ सदस्य छोटी बाई कुशवाहा बताती हैं कि आर्थिक तंगी के दौर में भी उन्होंने इस परंपरा को कभी रुकने नहीं दिया। आज परिवार की पांचवीं पीढ़ी भी उसी श्रद्धा के साथ बाबा की सवारी को फूलों और मालाओं से सजाकर बड़े बाजार से निकालती है।

💰 बिना चंदे की सेवा, मिसाल बनी आस्था

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए समाज या श्रद्धालुओं से कोई चंदा नहीं लिया जाता। कुशवाहा परिवार स्वयं अपनी मेहनत की कमाई से सवारी और भंडारे का पूरा खर्च उठाता है। मुंबई से ढोल और दिल्ली से सेहरा मंगवाकर इस सवारी को भव्य रूप दिया जाता है, जो शहर भर के लोगों के आकर्षण का केंद्र होता है।

🌍 एकता का संदेश: हिंदू-मुस्लिम समुदाय की बराबर भागीदारी

रोहित कुशवाहा और स्थानीय निवासी विनोद कुमार सोनी का कहना है कि यह सवारी अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विदिशा की पहचान बन चुकी है। इस आयोजन में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग कंधे से कंधा मिलाकर व्यवस्थाएं संभालते हैं। मुहर्रम के अवसर पर विदिशा की यह तस्वीर देश को एकता और भाईचारे का एक सशक्त संदेश देती है कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता ही है।