ब्रेकिंग
World Olympic Day 2026: रांची में विश्व ओलंपिक दिवस का भव्य आयोजन; मैराथन दौड़ और खिलाड़ियों का हुआ सम... Dr. Syama Prasad Mookerjee Balidan Diwas: रांची में बीजेपी नेताओं ने दी श्रद्धांजलि; कहा- डॉ. मुखर्ज... Ranchi News: अतिक्रमण मुक्त हुई सरकारी जमीन; रांची नगर निगम अब बनाएगा पार्क और वेंडर्स मार्केट Dhanbad News: बेलगड़िया के पास मोहली बस्ती में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव; पेयजल और रोशनी के लिए ... Ludhiana Police Action: पुलिस ने दबोचा शातिर चोर; नशा छुड़ाओ केंद्र से बाहर आते ही फिर शुरू की आपराध... Chandigarh News: सेक्टर-42 गर्ल्स कॉलेज में वेतन न मिलने से कर्मचारी परेशान; 3 महीने से नहीं मिली सै... Ludhiana News: लव मैरिज के बाद बड़ा विवाद; पत्नी और ससुराल पक्ष पर लाखों के गहने चोरी करने का आरोप Chandigarh Infrastructure: रात में स्नैचिंग और लूट पर लगेगी लगाम; शहर के साइकिल ट्रैक्स पर होगी दूधि... Gold Price Jalandhar: जालंधर में सोना-चांदी हुआ सस्ता; जानें क्या है आज का नया रेट और मार्केट अपडेट Ludhiana News: मानवाधिकार कमीशन सख्त; सरकारी रिकॉर्ड में 'नशेड़ी' बताए जाने पर सिविल सर्जन तलब

Sanjay Barwasni Protest: सोनीपत में जिला पार्षद का प्रदर्शन; अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे, सरकार को दी चेतावनी

सोनीपत: हरियाणा के सोनीपत में जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने विरोध का एक ऐसा तरीका अपनाया कि हर कोई देखता रह गया। आज वे खुद को बैलगाड़ी पर रखे एक पिंजरे के अंदर बेड़ियों से बांधकर जिला पंचायत कार्यालय की ओर निकले। उनका यह प्रदर्शन सरकार को जिला पार्षदों की अनदेखी और उनके अधिकारों के प्रति जगाने के लिए था।

📢 मुख्य मांग: विधायक और सांसद की तर्ज पर मिले ग्रांट

संजय बड़वासनी का कहना है कि जिला पंचायत लोकतंत्र की सबसे छोटी और महत्वपूर्ण इकाई है, जिसके जरिए धरातल पर विकास कार्य किए जाते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जिला पार्षदों की शेष मांगों पर जल्द गौर नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर सरकार के खिलाफ लामबंद होंगे। उनकी प्रमुख मांग है कि उन्हें भी विधायक और सांसद की तर्ज पर विकास कार्यों के लिए पर्याप्त ग्रांट दी जाए।

⚖️ अधिकारों के लिए सरकार को जगाने की कवायद

प्रदर्शनकारी पार्षद का कहना है कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सहमति तो जताई है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगें अभी भी फाइलों में दबी हुई हैं। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए ही उन्होंने इस अनोखे तरीके को चुना है। यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उन जनप्रतिनिधियों की आवाज है जो अपने क्षेत्र में विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, लेकिन अधिकारों के अभाव में बंधे हुए हैं।