ब्रेकिंग
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कर्नाटक में UAPA मामलों की रोजाना सुनवाई के लिए बनेगा अलग स्पेशल कोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में बड़ी कार्रवाई, राज्यसभा में पेश की गई 3 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट देहरादून-मसूरी मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के दौरान भीषण भूस्खलन, सड़क पर गिरा भारी मलबा जालंधर के अवतार नगर में सनसनीखेज डबल मर्डर, कलयुगी युवक ने अपनी पत्नी और पिता की हत्या कर मचाया हड़क... 'जंतर-मंतर सीजन-2' का जल्द होगा आगाज: CJP फाउंडर अभिजीत दिपके का बड़ा ऐलान, हॉल न मिलने पर भाजपा पर ... नोएडा में 'स्पेशल 26' स्टाइल में 29 लाख की भीषण लूट, फर्जी GST अधिकारी और पुलिसकर्मी बनकर 5 शातिर गि... बिहार में शराबबंदी लागू होने के एक दशक बाद फिर छिड़ी बहस, NCAER रिपोर्ट के बाद जीतन राम मांझी का बड़... जालोर में गोमाता के प्रति अनूठी आस्था, 'राधा' गाय पहनती है 10 किलो चांदी के गहने, बन रहा 1 करोड़ का ... ग्रेटर नोएडा में भारी बारिश से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में जलभराव, अखिलेश यादव ने सरकार पर कसा तंज बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर का 10 हजार नौकरियों का बड़ा ऐलान, बिहार के सियासी गलियारों में मचा हड़...

Protocol Violation in Bemetara: योग दिवस कार्यक्रम में प्रशासन की चूक; पोस्टर से साजा विधायक का फोटो गायब होने पर बवाल

बेमेतरा: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम उस समय राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया, जब साजा से भाजपा विधायक ईश्वर साहू अपनी तस्वीर बैनर-पोस्टर में न देखकर नाराज हो गए। विधायक ने इसे अपनी जानबूझकर की गई उपेक्षा और प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए मंच छोड़ दिया, जिससे वहां मौजूद आला अधिकारियों और गणमान्य लोगों के बीच हड़कंप मच गया।

📋 फोटो न होने पर बढ़ा विवाद

कार्यक्रम स्थल पर अन्य विधानसभा क्षेत्रों (बेमेतरा और नवागढ़) के जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें तो थीं, लेकिन साजा विधायक ईश्वर साहू की तस्वीर नदारद थी। इस घटनाक्रम के दौरान मंच पर राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा और बेमेतरा विधायक दीपेश साहू भी मौजूद थे। अपनी उपेक्षा से आहत विधायक ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास किया गया है और वे इस मामले की उच्च स्तरीय शिकायत करेंगे।

🤝 समझाइश के बाद लौटे विधायक

विधायक के मंच से उठकर जाने के बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उनसे चर्चा की और उन्हें मनाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत और समझाइश के बाद ईश्वर साहू दोबारा मंच पर लौटे और कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि, यह घटना जिले के प्रशासनिक समन्वय और आयोजन समिति की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर गई है।

🧐 प्रशासन की घोर लापरवाही पर सवाल

यह घटना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, तो प्रचार सामग्री तैयार करते समय साजा विधायक की तस्वीर को क्यों नजरअंदाज किया गया? इसे प्रशासन की ‘घोर लापरवाही’ के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी आयोजनों में जनप्रतिनिधियों का सम्मान और प्रोटोकॉल का पालन करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें इस बार चूक हुई है।