ब्रेकिंग
नागपंचमी पर आस्था का महासैलाब: नागलवाड़ी भिलट देव में 4 लाख भक्तों ने टेका मत्था; महाकाल पहुंचे क्रि... निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस ने कसी कमर: भोपाल से शुरू हुआ 'बेहतर सिटी अभियान', वार्ड-वार्ड जाकर उठाए... सड़क हादसे के बाद AIIMS भोपाल में युवक हुआ ब्रेन-डेड, परिजनों ने लिया अंगदान का फैसला छिंदवाड़ा में खाद वितरण पर लगी अंतरिम रोक: धांधली के आरोपों के बीच किसानों का चक्काजाम, स्टॉक सत्याप... छिंदवाड़ा: सावन-भादों में पलाश के पत्तों से जीवंत हो रही सदियों पुरानी परंपरा, आजीविका और आस्था का अ... श्योपुर के रघुनाथपुर में स्कूल की छत भरभराकर गिरी, शाम का समय होने से टला बड़ा हादसा ग्वालियर SP ऑफिस में कांग्रेस जिला महामंत्री राजेश किरार ने खाया जहर, अस्पताल में मौत; सुसाइड नोट मे... हथियार ढूंढने गई थी पुलिस, अलमारी से निकला 3 करोड़ रुपयों का अंबार; नोट गिनने के लिए मंगवानी पड़ी मश... उज्जैन नागचंद्रेश्वर मंदिर में करंट की अफवाह से मची भगदड़: बैरिकेडिंग टूटने से कई श्रद्धालु घायल, चर... एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा केस में CBI की 636 पेज की चार्जशीट, पति समर्थ और सास पर दहेज हत्या का केस

NEET-UG Re-Exam Raipur: जेल की सलाखों से परीक्षा केंद्र तक; हत्या के आरोपी छात्र ने कड़ी सुरक्षा में दी नीट की परीक्षा

रायपुर: परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सपनों की उड़ान को कैद करना आसान नहीं होता। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद एक छात्र कुणाल तरुणकर ने आज शिक्षा और न्याय के बीच संतुलन की एक अनूठी मिसाल पेश की। गंभीर आरोपों के चलते न्यायिक हिरासत में होने के बावजूद, हाईकोर्ट के विशेष आदेश पर उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला।

🚓 पुलिस और जेल प्रशासन की विशेष टीम की निगरानी में परीक्षा

कुणाल तरुणकर, जो रायपुर के शिवानंद नगर का निवासी है, उसे सुबह जेल से परीक्षा केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी पुलिस और जेल प्रशासन की एक विशेष टीम ने संभाली। एएसआई, हवलदार और सिपाहियों के सुरक्षा घेरे में उसे डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र पहुँचाया गया। सामान्य परीक्षार्थियों के बीच जेल से आए इस छात्र का वहां पहुँचना हर किसी के लिए चर्चा का विषय बन गया।

📜 हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण मानवीय आदेश

कुणाल पर एक युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर आरोप है, जिसके चलते वह BNS की धारा 108 के तहत न्यायिक हिरासत में है। हालांकि, परीक्षा की तारीख नजदीक आने पर उसके अधिवक्ता अनुकूल विश्वास ने हाईकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई की याचिका लगाई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक शिक्षा का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। अदालत ने प्रशासन को छात्र को समय पर परीक्षा केंद्र पहुँचाने के निर्देश दिए थे।

🌟 सपनों की परीक्षा और भविष्य की अनिश्चितता

यह मामला समाज में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या किसी व्यक्ति का शैक्षणिक भविष्य तब तक समाप्त मान लिया जाना चाहिए जब तक कि अदालत का अंतिम फैसला न आ जाए? आज रायपुर में आरोपों के बोझ और सपनों के भार के बीच कानून ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्र को अपने भविष्य के लिए संघर्ष करने का एक मौका दिया। अब परीक्षा परिणाम और न्यायालय का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि कुणाल के डॉक्टर बनने का सपना साकार होगा या नहीं।