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Peepal Tree Puja Rules: रविवार को क्यों नहीं की जाती पीपल की पूजा? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

धार्मिक डेस्क: सनातन धर्म में पीपल के वृक्ष को साक्षात देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, पीपल के मूल में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और अग्र भाग में भगवान शिव का वास होता है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, “अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम”, अर्थात वृक्षों में मैं पीपल हूं। स्कंद पुराण के अनुसार, इसकी जड़ों से लेकर फलों तक समस्त देवताओं का वास है।

🚫 रविवार को पूजा वर्जित क्यों?

इतनी दिव्यता के बाद भी रविवार के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करना शास्त्रों में वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से घर में दरिद्रता का आगमन होता है। इसके पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा है, जो माता लक्ष्मी और उनकी बहन दरिद्रा से जुड़ी है।

📖 पौराणिक कथा: दरिद्रा का पीपल में वास

कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी और उनकी बहन दरिद्रा को पीपल के वृक्ष में निवास करने का स्थान दिया। बाद में जब लक्ष्मी जी के विवाह की बात आई, तो उन्होंने शर्त रखी कि पहले उनकी बहन दरिद्रा का विवाह हो। दरिद्रा ने भगवान विष्णु से ऐसा वर मांगा जो कभी पूजा-पाठ न करे और उसे ऐसी जगह रखे जहां कोई पूजन न होता हो।

भगवान ने दरिद्रा का विवाह एक ऋषि से करा दिया और उसे रविवार के दिन पीपल के वृक्ष में वास करने का स्थान दिया। यही कारण है कि रविवार के दिन पीपल के वृक्ष में देवताओं का वास नहीं होता, बल्कि उस दिन वहां दरिद्रा का निवास माना जाता है।

⚠️ सावधानी और पूजन के नियम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार को पीपल की पूजा करने पर दरिद्रा प्रसन्न होती हैं और पूजन करने वाले व्यक्ति के घर में उनका प्रवेश हो जाता है। इसलिए, सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए रविवार को पीपल की पूजा करने से बचना चाहिए और अन्य दिनों में श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।