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Water Supply Jharkhand: बूंद-बूंद पानी को तरसते थे साल्वे गांव के लोग; अब जल जीवन मिशन ने आसान बनाया जीवन

लातेहार: सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन और निगरानी की जाए, तो वे आम लोगों का जीवन कैसे बदल सकती हैं, इसका बेहतरीन उदाहरण लातेहार जिले का साल्वे गांव है। कभी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाले इस आदिवासी और दलित बहुल गांव में आज ‘जल जीवन मिशन’ के तहत हर घर में नल से शुद्ध जल पहुंच रहा है। 1000 की आबादी वाला यह गांव अब पानी की समस्या से पूरी तरह मुक्त है।

🚧 पहले की स्थिति: नदी-नालों पर निर्भरता

कुछ वर्ष पहले तक साल्वे गांव की महिलाओं की दिनचर्या पानी की तलाश में ही शुरू होती थी। उन्हें मुख्य रूप से नदी, नाला और कुओं पर निर्भर रहना पड़ता था। बरसात के मौसम में नदी-नालों में बाढ़ आने पर ग्रामीण गंदा पानी पीने को विवश थे। पानी लाने के लिए उन्हें मीलों दूर जाना पड़ता था, जिससे उनका अधिकांश समय इसी जद्दोजहद में निकल जाता था।

🛠️ ग्रामीणों की सक्रियता और बेहतर मॉनिटरिंग

साल्वे गांव की सफलता का सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों की सक्रियता है। गांव में 8 जल मीनारें लगाई गई हैं, जिनकी देखरेख ग्रामीण खुद करते हैं। वे जल शुल्क के रूप में मामूली राशि जमा करते हैं, ताकि छोटी-मोटी खराबी तुरंत ठीक की जा सके। इसके अलावा, विभाग के सहायक अभियंता प्रशांत पांडेय और कनीय अभियंता राहुल कुमार सिंह नियमित मॉनिटरिंग करते हैं। जलसहिया की सक्रियता और स्थानीय प्लंबर की उपलब्धता के कारण किसी भी खराबी को 24-48 घंटे के भीतर ठीक कर दिया जाता है।

🌟 अन्य गांवों के लिए एक संदेश

सहायक अभियंता प्रशांत पांडेय ने बताया कि यहां के ग्रामीणों का सहयोग ही इस योजना की कामयाबी का राज है। उन्होंने राज्य के अन्य गांवों से भी अपील की है कि वे सरकारी योजनाओं के बेहतर संचालन में प्रशासन का सहयोग करें। साल्वे गांव का यह मॉडल न केवल लातेहार जिले के लिए, बल्कि पूरे झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा है।