ब्रेकिंग
JPSC-JSSC धांधली के खिलाफ रांची में छात्रों का हुंकार: मंत्री प्रतिनिधिमंडल संग बैठक विफल, TDPL कंपन... कांवड़ सेवा से समाज में सेवा, संस्कार और सहयोग की भावना मजबूत होती है : Mukesh Sharma राहुल गांधी की पोस्ट पर किरेन रिजिजू का पलटवार, कहा— "राहुल की सोच बदली, उम्मीद है महिला आरक्षण बिल ... पेट्रोल-डीजल के ताज़ा रेट जारी: दिल्ली, मुंबई से पटना तक जानें 8 अगस्त के दाम; क्रूड ऑयल पर ईरान-ओमा... जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ CIK का बड़ा एक्शन, सिम कार्ड दुरुपयोग और UAPA मामलों में कई जिलों ... कर्नाटक के कलबुर्गी में बाढ़ से बिगड़े हालात, उफनती कमलावती नदी में ट्रैक्टर पर शव ले जाकर हुआ अंतिम... बरेली में गजब कारनामा: संदिग्ध परिस्थितियों में गायब महिला दूसरे समुदाय के युवक के घर डबल बेड के नीच... कानपुर देहात में प्रेमी जोड़े को तालिबानी सजा: रस्सी से बांधकर लाठी-डंडों से पीटा, वीडियो वायरल होने ... यूपी में सियासी घमासान: "सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है"— मायावती और बृजेश पाठक का अखिलेश यादव पर ती... कांवड़ यात्रा नियम: सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने के बाद भी रखें इन बातों का ध्यान, न करें ये गलतियां

Andhra Pradesh News: चित्तूर में मेले के दौरान रोकी गई भैंस की बलि; प्रशासन और पुलिस की सतर्कता से बची जान

चित्तूर: आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पुथलपट्टू मंडल स्थित थिम्मिरेड्डीपल्ली गांव में पशु बलि रोकने का एक अनोखा मामला सामने आया है। गांव वाले एक मेले (अम्मावरी जतारा) के दौरान 50,000 रुपये में खरीदी गई भैंस की बलि देने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन प्रशासन और पुलिस की तत्परता से इसे रोक दिया गया।

🛡️ युवाओं के विरोध से शुरू हुई कार्रवाई

मेले के दौरान पशु बलि की जानकारी मिलते ही गांव के तीन जागरूक युवकों ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने भैंस की तस्वीरों के साथ केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय को ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज कराई। केंद्रीय अधिकारियों के निर्देश पर जिला कलेक्टर और एसपी तुषार दुदी ने तत्काल संज्ञान लिया। पुथलपट्टू तहसीलदार उदय सतीश और भारी पुलिस बल ने गांव पहुंचकर बलि की प्रक्रिया को रुकवा दिया।

👮 रात भर रही पुलिस की निगरानी

अधिकारियों ने न केवल भैंस को सुरक्षित किया, बल्कि पूरी रात उस इलाके की निगरानी की जहां उसे बांधा गया था। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गांव वालों ने पारंपरिक तरीके से कुंभ का आयोजन किया और पूजा-अर्चना की। किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए मेले के समापन तक पुलिस बल तैनात रहा।

💡 गांव वालों का पक्ष

ग्रामवासियों का कहना था कि वे लगभग 40 वर्षों बाद गांव की सुख-शांति और समृद्धि के लिए यह बलि देना चाहते थे। हालांकि, सरकारी हस्तक्षेप के कारण उन्हें अपनी योजना बदलनी पड़ी। यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ पशु अधिकार और पारंपरिक मान्यताओं के बीच एक बड़ी बहस देखने को मिली है।