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Ghaziabad News: फादर्स डे से पहले बेटियों का अनमोल तोहफा; पिता को बचाई जान, एक ने दी किडनी तो दूसरी ने लीवर

गाजियाबाद: अक्सर कहा जाता है कि बेटियां परिवार की शान होती हैं, लेकिन गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों—रिषिका और खुशी—ने इसे सच साबित कर दिखाया है। फादर्स डे से ठीक पहले, इन बेटियों ने अपने पिता जयंत त्यागी के जीवन पर मंडराते मौत के संकट को न केवल टाला, बल्कि अपने अंगों का दान कर उन्हें नई जिंदगी का सबसे अनमोल तोहफा दिया है।

🏥 मौत से जंग और बेटियों का संकल्प

पूर्व भाजपा सेक्टर संयोजक जयंत त्यागी (45) अचानक एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए थे। डॉक्टरों ने बताया कि उनके लीवर और किडनी दोनों खराब हो चुके हैं और प्रत्यारोपण ही एकमात्र रास्ता है। परिवार गहरे सदमे में था, लेकिन पिता को खोने के डर से बेटियों ने जो फैसला लिया, वह पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया। दोनों बेटियों का बस एक ही संकल्प था—”पापा को कुछ नहीं होने देंगे।”

💍 शादी की चिंता छोड़ी, पिता को चुना

बड़ी बेटी रिषिका त्यागी, जो कि बीटेक ग्रेजुएट है और जिसकी कुछ ही महीनों में शादी होने वाली है, उसने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी किडनी दान करने का निर्णय लिया। उसके होने वाले ससुराल पक्ष ने भी इस फैसले का सम्मान करते हुए पूरा समर्थन दिया। वहीं, बीटेक प्रथम वर्ष की छात्रा छोटी बेटी खुशी ने अपने लीवर का हिस्सा दान करने का ऐतिहासिक कदम उठाया।

🩺 सफल ऑपरेशन और स्थिर स्थिति

नोएडा के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने लंबी काउंसलिंग और चिकित्सीय प्रक्रियाओं के बाद एक जटिल और लंबे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। वर्तमान में जयंत त्यागी और उनकी दोनों बेटियां पूरी तरह से स्थिर और सामान्य हैं।

🎖️ समाज और संगठन में बेटियों के साहस को सलाम

जयंत त्यागी के भाई अमित रंजन ने बताया कि शुरुआत में परिवार बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित था, लेकिन बेटियों के अटूट भरोसे ने सबको हिम्मत दी। भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल सहित क्षेत्र के हर व्यक्ति और संगठन के कार्यकर्ताओं ने इन बेटियों के साहस और त्याग को सलाम किया है। यह कहानी सिखाती है कि बेटियां माता-पिता के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।