Global Oil Market Impact: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से क्रूड ऑयल के दाम में गिरावट; क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शांति की उम्मीदें जगी हैं। खबरों के अनुसार, ईरान शांति प्रस्ताव पर सहमत हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार की लाइफलाइन मानी जाने वाली ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जल्द खुलने की उम्मीद है। इस खबर के आते ही क्रूड ऑयल और ब्रेंट क्रूड के दामों में 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
🚢 क्यों है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ‘ग्लोबल एनर्जी लाइफलाइन’?
अमेरिका ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक, वैश्विक पेट्रोलियम खपत का लगभग 20% हिस्सा और दुनिया के 20% LNG व्यापार की आवाजाही इसी संकरे समुद्री रास्ते से होती है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह मार्ग दुनिया के हर पांच में से एक बैरल तेल का रास्ता है। इसमें किसी भी तरह की बाधा पूरी दुनिया की तेल अर्थव्यवस्था को हिलाने की क्षमता रखती है।
🇮🇳 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज का सामान्य होना?
भारत अपनी जरूरत का 85-88% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से 35-40% हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने का सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों के रूप में दिखा था। होर्मुज के सुचारू रूप से खुलने से न केवल आयात बिल में राहत मिलेगी, बल्कि सरकार पर भी महंगाई का दबाव कम होगा और चालू खाता घाटा (CAD) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
📈 किन सेक्टरों को मिलेगी राहत?
तेल की कीमतों में स्थिरता आने से भारतीय अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख सेक्टरों को बड़ा लाभ होगा:
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एयरलाइंस और ट्रांसपोर्ट: ईंधन की लागत कम होने से कंपनियों के मार्जिन में सुधार होगा।
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लॉजिस्टिक्स: परिवहन लागत घटने से उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम होगा।
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केमिकल और पेंट उद्योग: पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतें कम होने से इन उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।
⏳ क्या तुरंत सामान्य होगी स्थिति?
हालांकि बाजार में राहत का माहौल है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सप्लाई चेन को पूरी तरह से ‘प्री-क्राइसिस’ स्थिति में आने में करीब एक साल का समय लग सकता है। बीमा कंपनियों द्वारा वसूला जाने वाला अतिरिक्त प्रीमियम और शिपिंग लागत कम होने में समय लगेगा, जिसके बाद ही उपभोक्ताओं को कीमतों में वास्तविक गिरावट का लाभ मिलेगा।