सीहोर: सीहोर की माटी के लाल और देश के शीर्ष पैरा जूडो खिलाड़ी कपिल परमार ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नागोया (जापान) में आयोजित होने वाले एशियन पैरा गेम्स 2026 के लिए कपिल का चयन भारतीय पैरा जूडो टीम में हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
⚡ 11 हजार वोल्ट के करंट को दी मात
कपिल का जीवन संघर्ष की जीवंत गाथा है। मात्र 9 वर्ष की आयु में एक भयानक हादसे में 11 हजार वोल्ट के हाई-टेंशन तार की चपेट में आने के कारण उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित होने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और जूडो के कठिन दांव-पेंच सीखे।
☕ चाय की दुकान से पैरालंपिक तक
आर्थिक तंगी के कारण कपिल ने अपने भाइयों के साथ चाय की दुकान पर काम किया। चाय बनाने से लेकर बर्तन धोने तक, उन्होंने हर काम किया ताकि वे अपनी खेल ट्रेनिंग का खर्च उठा सकें। उनके कोच भगवान दास ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और तराशा। आज वे अपने 60 किलोग्राम भारवर्ग में विश्व रैंकिंग में नंबर 1 रह चुके हैं।
🎖️ असाधारण उपलब्धियां और सम्मान
कपिल परमार के नाम कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हैं:
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पेरिस पैरालंपिक 2024: भारत के लिए जूडो में पहला कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।
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एशियन पैरा गेम्स 2023: रजत पदक अपने नाम किया।
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सम्मान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सराहना, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मान और रिलायंस फाउंडेशन द्वारा विशेष प्रोत्साहन।
🎯 लक्ष्य: जापान में स्वर्ण पदक
ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में कपिल ने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य जापान की धरती पर तिरंगे को ऊंचा लहराना और स्वर्ण पदक जीतना है। उनकी यह यात्रा बताती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक अक्षमता और गरीबी कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।