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India’s Smart Border: सीमाओं पर तैनात होगा स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम; अमित शाह ने कहा- ‘अब कोई नहीं कर पाएगा घुसपैठ’

नई दिल्ली: भारत सरकार ने अपनी सीमाओं को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सीमाओं पर बढ़ती ड्रोन घुसपैठ और हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए स्वदेशी ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ और ‘स्मार्ट बॉर्डर ग्रिड’ तकनीक विकसित कर ली गई है। गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, यह तकनीक सीमाओं पर तैनात सुरक्षा बलों को एक ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ से निपटने की अद्भुत क्षमता प्रदान करेगी।

📡 क्या है ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की तकनीक?

यह प्रोजेक्ट केवल बाड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ‘स्मार्ट बॉर्डर ग्रिड’ है जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों का एकीकरण किया गया है:

  • एंटी-ड्रोन सिस्टम: हवा में ही संदिग्ध ड्रोन को ट्रैक और निष्क्रिय करने की क्षमता।

  • स्मार्ट सेंसर और रडार: घुसपैठ का सटीक पता लगाने के लिए AI-आधारित रडार।

  • हाई-टेक कैमरे: हर गतिविधि पर 24/7 डिजिटल निगरानी।

  • डिजिटल नेटवर्क: एक ऐसा इंटीग्रेटेड ग्रिड जो सभी सुरक्षा बलों को रियल-टाइम जानकारी देगा।

🧱 ‘4-लेयर सुरक्षा ग्रिड’ का विजन

गृह मंत्रालय एक चौतरफा सुरक्षा घेरा तैयार कर रहा है, जिसमें शामिल हैं:

  1. सशस्त्र बल: BSF और SSB की अग्रिम तैनाती।

  2. आधुनिक तकनीक: AI कैमरे, रडार और एंटी-ड्रोन इकोसिस्टम।

  3. स्थानीय प्रशासन: संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस बल।

  4. जनभागीदारी: सीमावर्ती गांवों के निवासी और जनप्रतिनिधि।

🗓️ प्रोजेक्ट का रोडमैप: 2027 तक का लक्ष्य

इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है:

  • पायलट प्रोजेक्ट (2026): पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के 7-8 सबसे संवेदनशील इलाकों में ट्रायल।

  • अपग्रेडेशन: 15 साल पुरानी 119 किलोमीटर लंबी पारंपरिक बाड़ को आधुनिक फेंसिंग से बदला जा रहा है।

  • व्यापक विस्तार (2027): पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, इसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के पूरे बॉर्डर नेटवर्क पर लागू किया जाएगा।

📍 50 किलोमीटर के दायरे में कड़ी नजर

नई नीति के तहत, BSF को अंतरराष्ट्रीय सीमा के भीतर 50 किलोमीटर के दायरे में किसी भी संदिग्ध निर्माण या डेमोग्राफिक बदलाव पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय सरपंचों और पटवारियों के समन्वय से ग्राम-स्तरीय खुफिया नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि ड्रोन से गिराए गए हथियारों या नशीले पदार्थों को रिसीव करने वाले आंतरिक नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।