ब्रेकिंग
Mahakaleshwar Temple News: उज्जैन में महाकाल दर्शन करने आए युवक-युवती के साथ मंदिर परिसर में धक्का-म... Neemuch News: महज 3 फीट जमीन के लिए भाई ने भाई को उतारा मौत के घाट; कुल्हाड़ी और लाठियों से बेरहम हत्... Child Labour Case: बाल श्रम के खिलाफ खंडवा प्रशासन सख्त; बीयर बार संचालक पर FIR, बच्चों का होगा पुनर... Sonam Raghuvanshi Bail: पति की हत्या कर प्रेमी संग फरार हुई थी सोनम; जमानत मिलते ही छलका मृतक की मां... NEET Re-Exam 2026: मध्य प्रदेश में नीट पुनर्परीक्षा की तैयारी; इंदौर में सबसे ज्यादा केंद्र, सीएम के... MP Road Accidents: मध्य प्रदेश में हर दिन 283 लोग हो रहे सड़क हादसों का शिकार; 108 एंबुलेंस की रिपोर्... Big Operation in Burhanpur: सालभर के दर्द से मिली मुक्ति; बुज़ुर्ग महिला की जान बचाकर जिला अस्पताल की... Chhatarpur News: सपा अध्यक्ष की बेटी पर सोशल मीडिया टिप्पणी बनी मुसीबत; हिंदूवादी नेता प्रशांत मेहतो... MP Assembly Session: मानसून सत्र में पेश होगा अनुपूरक बजट; 5 दिनों के सत्र को लेकर विपक्ष का सरकार प... ED Action in Bhopal: मेडिकल एजुकेशन विभाग के क्लर्क पर ED का शिकंजा; 1.47 करोड़ की संपत्ति अटैच

Rampur Firing Case: रामपुर गोलीकांड के विरोध में गढ़वा में भाकपा माले का प्रदर्शन; विधायक अरूप चटर्जी ने घेरा प्रशासन

झारखंड के पलामू में हुए चर्चित रामपुर गोलीकांड को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इस घटना के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले की ओर से एक विशाल और आक्रोशित विरोध मार्च निकाला गया. पलामू प्रशासन की पाबंदियों के कारण यह विरोध मार्च पड़ोसी जिले गढ़वा में आयोजित किया गया. इस हाई-प्रोफाइल प्रतिरोध मार्च में माले के दिग्गज नेता और विधायक अरूप चटर्जी, बिहार से आए माले विधायक अरुण सिंह और बगोदर के पूर्व विधायक विनोद सिंह विशेष रूप से शामिल हुए. इन नेताओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया और इसके बाद पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया.

🚫 पलामू में निषेधाज्ञा लागू होने के कारण गढ़वा में बदला रूट: कोटा गांव से शुरू होकर बॉर्डर पर जनसभा में तब्दील हुआ मार्च

उल्लेखनीय है कि रामपुर गोलीकांड की हिंसक घटना के बाद स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पलामू और गढ़वा जिला प्रशासन ने पूरे इलाके में एहतियातन निषेधाज्ञा (धारा 144/163) लागू कर दी थी. शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसके कारण प्रशासन ने बाहरी भीड़ और राजनीतिक नेताओं को रामपुर गांव में घुसने की अनुमति नहीं दी. इसी प्रशासनिक दवाब के चलते माले को अपना विरोध मार्च पलामू के बजाय गढ़वा की सीमा से निकालना पड़ा. यह मार्च गढ़वा के डंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोटा गांव से पूरी तैयारी के साथ शुरू हुआ, जो पलामू-गढ़वा बॉर्डर इलाके में पहुंचकर एक विशाल विरोध सभा में तब्दील हो गया.

💬 ‘झारखंड में बढ़ गया है भू-माफिया और सामंतों का मनोबल’: मार्च को संबोधित करते हुए गरजे माले विधायक अरूप चटर्जी

बॉर्डर पर आयोजित विरोध सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले विधायक अरूप चटर्जी ने राज्य सरकार और स्थानीय तंत्र पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “पलामू और पूरे झारखंड में इस वक्त भू-माफिया और सामंती ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है. सरेआम गोलियां चलाई जा रही हैं. आखिर इन अपराधियों को यह राजनीतिक और प्रशासनिक ताकत कहां से मिल रही है?” उन्होंने जनता से अपील की कि उन्हें अपने हक के लिए दोस्त और दुश्मन में फर्क करने की जरूरत है. विधायक चटर्जी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि रामपुर गोलीकांड का यह गंभीर मुद्दा आने वाले झारखंड विधानसभा के सत्र में पूरी मजबूती के साथ उठाया जाएगा. उन्होंने मांग की कि गोली लगने से घायल हुए व्यक्ति के परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए तथा आरोपियों के हथियारों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं.

⚖️ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर बिहार के विधायक अरुण सिंह ने उठाए सवाल: ‘सिकंदर चौधरी को न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई’

वहीं, बिहार से इस मार्च में शामिल होने आए माले विधायक अरुण कुमार सिंह ने प्रशासनिक रवैए पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पहले से तय था, लेकिन पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने के लिए निषेधाज्ञा लगा दी. उन्होंने सीधे सवाल किया कि आखिर पुलिस पर ऐसा क्या राजनीतिक दबाव है कि वे चिन्हित अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं.

सभा के अंत में बगोदर के पूर्व विधायक विनोद सिंह ने हुंकार भरते हुए कहा कि रामपुर की यह हिंसक घटना कोई आम बात नहीं है, बल्कि यह सामंती सोच का प्रतीक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे और उनकी पार्टी न्याय के लिए एकजुट होकर और मजबूती से जमीनी लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक कि गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल हुए सिकंदर चौधरी और उनके परिवार को पूरा न्याय और सुरक्षा नहीं मिल जाती.