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Jobs in Jharkhand: मनरेगा भर्ती में देरी से परेशान उम्मीदवार, समाहरणालय पहुंचकर की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग

पाकुड़ जिला प्रशासन द्वारा MGNREGA के अंतर्गत दो दर्जन पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने में हो रही विफलता ने अभ्यर्थियों का धैर्य तोड़ दिया है। पिछले ढाई वर्षों से समाहरणालय के चक्कर लगा रहे उम्मीदवारों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही बहाली प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

📋 क्या है पूरा मामला?

अभ्यर्थियों के अनुसार, नवंबर 2023 में रोजगार सेवक, कंप्यूटर सहायक, लेखा सहायक, जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर के पदों के लिए टेंडर जारी किए गए थे। आवेदन प्रक्रिया सितंबर 2023 में पूरी हो गई थी। हालांकि, रोजगार सेवक और कंप्यूटर सहायक के पद तो भर लिए गए, लेकिन शेष पदों (जूनियर-असिस्टेंट इंजीनियर, लेखा सहायक और BPO) की न तो परीक्षा हुई और न ही कोई आगे की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद उपायुक्त के आदेश से इस पूरी बहाली प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया था।

📢 ढाई साल से आश्वासन, समाधान शून्य

प्रदर्शनकारी सुरेंद्र कुमार हेंब्रम, सुनील मरांडी और अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि वे बीते ढाई वर्षों से डीसी (DC) और डीडीसी (DDC) से लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिल रहे हैं। लंबे समय से नियुक्ति प्रक्रिया लंबित रहने के कारण कई उम्मीदवारों की उम्र सीमा निकल रही है, जिससे उनमें भारी हताशा और आक्रोश है।

🛠️ प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस मामले पर जब उप विकास आयुक्त (DDC) अरविंद कुमार लाल से जानकारी ली गई, तो उन्होंने माना कि उम्मीदवारों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला है। उन्होंने कहा, “भर्ती प्रक्रिया इतने लंबे समय तक क्यों अटकी रही, इसके कारणों की जांच की जाएगी। प्रशासन जल्द से जल्द प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास करेगा ताकि योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।”

संपादकीय टिप्पणी: ढाई वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया का लंबित रहना प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है। क्या आपको लगता है कि सरकारी भर्तियों के लिए एक ‘निश्चित समय-सीमा’ (Time-bound recruitment) का कानून सख्ती से लागू होना चाहिए ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रहे? अपने विचार नीचे साझा करें।