ब्रेकिंग
Make in India Security Breach: स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के साथ खिलवाड़; सप्लायर कंपनी पर HAL की सख्... Surat Police Bravery: सूरत पुलिस ने दिखाई दरियादिली; जहर खाने वाले युवक को 7वीं मंजिल से सुरक्षित बच... Mamata Banerjee FIR: ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें; भड़काऊ बयान के मामले में कोलकाता में दर्ज हुई FIR Bikram Majithia vs Sanjay Singh: सुप्रीम कोर्ट से मजीठिया को झटका; मानहानि मामले में अतिरिक्त गवाह ब... Jammu-Kashmir Border Alert: घुसपैठ की साजिश! कठुआ सेक्टर में जैश आतंकियों की सक्रियता, हाई अलर्ट पर ... Supreme Court on Officer Dispute: रोहिणी सिंदूरी और डी रूपा मौदगिल विवाद; SC ने जस्टिस कुरियन जोसेफ ... PM Modi 12 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों का कार्यकाल 'जनकल्याण और सुशासन' का प्रतीक ... Uttarakhand Accident News: पिथौरागढ़ की दारमा घाटी में कार पर गिरी चट्टान, 2 पर्यटकों की मौत; 3 गंभी... Kainchi Dham Mela: कैंची धाम स्थापना दिवस पर उमड़ेगी लाखों की भीड़, भारी वाहनों पर रोक और ट्रैफिक एडवा... Bihar Politics: बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को दिया बड़ा झटका? विधान परिषद में जगह नहीं मिलने से बढ़ी सि...

Road Struggle in Bijapur: बस्तर का कोत्तापल्ली गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं को मोहताज; ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार

बीजापुर जिले का कोत्तापल्ली गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से वंचित है। उसूर ब्लॉक की ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर के अंतर्गत आने वाला यह गांव आजादी के इतने वर्षों बाद भी पक्की सड़क का इंतजार कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि गांव के पास से ही राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है जो तेलंगाना को जोड़ता है, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए आज भी ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर कच्चे और पथरीले रास्तों से गुजरना पड़ता है।

⛈️ आवागमन में जान का जोखिम

गांव के लोगों को किसी भी शासकीय कार्य के लिए ब्लॉक मुख्यालय आवापल्ली तक पहुंचने के लिए 52 किलोमीटर का लंबा और कष्टदायक सफर तय करना पड़ता है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है जब स्थानीय नदी-नाले उफान पर होते हैं। उस समय ग्रामीणों का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह कट जाता है।

🗣️ प्रशासन की उदासीनता और ग्रामीणों का दर्द

ग्रामीण नागेश कुमार का कहना है कि न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव का हाल जानने आया और न ही जनप्रतिनिधियों ने समस्याओं पर ध्यान दिया। हालांकि, वर्ष 2017 में एक बार शिविर का आयोजन हुआ था, लेकिन उसके बाद से स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों का कहना है कि अब बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है, तो फिर विकास कार्यों में इतनी देरी क्यों हो रही है? गांव में आज भी बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं।

📍 अधूरी सड़क और ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने बताया कि उसूर से तेलंगाना के पुसगुप्फा तक सड़क बन चुकी है, लेकिन भीमाराम और रायपुरम के बीच करीब 20-25 किलोमीटर का मार्ग आज भी अधूरी है। यह सड़क ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि कोत्तापल्ली को जोड़ने वाली इस सड़क का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि उन्हें भी विकास के समान अवसर और सुविधाएं मिल सकें।

संपादकीय टिप्पणी: बुनियादी सुविधाओं का अभाव किसी भी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। क्या आपको लगता है कि प्रशासन को बस्तर के ऐसे दूरदराज के गांवों के विकास के लिए ‘समयबद्ध कार्ययोजना’ (Time-bound Action Plan) लागू करनी चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।