ब्रेकिंग
Delhi CM Tribute: मालवीय नगर अग्निकांड और साकेत हादसे के पीड़ितों को CM रेखा गुप्ता ने दी श्रद्धांजल... Ajmera Group Money Laundering Case: निवेशकों के लिए बड़ी राहत; कोर्ट ने 8.41 करोड़ की संपत्ति लौटाने ... DRDO Missile Test: भारत की बढ़ी मारक क्षमता; DRDO ने किया बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप मिसाइल ... Punjab BJP Strategy Meeting: दिल्ली में अमित शाह के साथ बीजेपी का बड़ा मंथन; विधानसभा चुनावों के लिए ... Begusarai Police Action: आबकारी सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले नकल गिरोह का पर्दाफाश; 38 वॉकी-टॉकी और ... Diesel Purchase Rules: डीजल खरीद पर सरकार की नई पाबंदी से नोएडा की सोसाइटियों में हड़कंप; बढ़ सकता है ... Saharanpur News: एटीएस और एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई; संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में युवक गिरफ्तार Katihar Bus Accident: बिहार के कटिहार में मजदूरों से भरी बस पलटी, 25 घायल; 15 की हालत गंभीर SRMS Bareilly Ragging Case: मेडिकल छात्र की आत्महत्या की कोशिश; सीनियर छात्रों और कॉलेज प्रशासन पर F... Greater Noida GST Office: मीटिंग में फटकार के बाद डिप्टी कमिश्नर की बिगड़ी तबीयत; विभागीय अधिकारियों ...

MP Board Result Scam: 12वीं की छात्रा को मिले थे मात्र 3 अंक, रिचेकिंग में बढ़े 60 अंक; बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के देवास जिले के कमलापुर से सामने आए एक मामले ने माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। कक्षा 12वीं की छात्रा पलक चौहान को अंग्रेजी विषय की थ्योरी परीक्षा में 80 में से मात्र 3 अंक दिए गए थे। छात्रा के आत्मविश्वास और मेहनत के सामने जब यह परिणाम आया, तो वह टूट गई थी।

📝 रिचेकिंग से खुला लापरवाही का सच

ग्राम डिगोद की निवासी पलक चौहान ने अपनी मेहनत पर भरोसा रखते हुए रिचेकिंग (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन किया। जब दोबारा परिणाम घोषित हुआ, तो हर कोई हैरान रह गया। पलक के अंकों में 60 अंकों का भारी उछाल आया और उसे 80 में से 63 अंक प्राप्त हुए। इस बड़े अंतर ने स्पष्ट कर दिया कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में न केवल लापरवाही हुई, बल्कि अंकों को जोड़ने में भी बड़ी गड़बड़ की गई थी।

⚖️ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली पर आक्रोश

इस मामले ने उन हज़ारों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है, जो बोर्ड की कार्यप्रणाली के कारण कम अंक मिलने पर मानसिक अवसाद का शिकार हो जाते हैं या दोबारा परीक्षा देने को मजबूर होते हैं। पलक चौहान का मामला तो केवल एक उदाहरण है, जो मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों और बोर्ड की उस प्रक्रिया पर सवाल उठाता है जहाँ एक छात्र के अंकों में 60 अंकों का अंतर आ जाता है।

संपादकीय टिप्पणी: क्या माध्यमिक शिक्षा मंडल को उन शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जिनकी लापरवाही के कारण छात्र का कीमती समय और आत्मविश्वास दांव पर लग जाता है? अपने विचार नीचे कमेंट्स में साझा करें।