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Adhik Maas Purnima 2026: अधिकमास पूर्णिमा पर स्नान-दान का विशेष महत्व; जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

ज्योतिष शास्त्र में अधिकमास की पूर्णिमा अत्यंत विशेष मानी जाती है क्योंकि यह तिथि तीन वर्षों में केवल एक बार आती है। भगवान विष्णु को समर्पित इस माह की पूर्णिमा पर स्नान, दान और पूजा का फल सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि आज दोपहर 02:14 बजे तक प्रभावी है, इसलिए आज का दिन धर्म-कर्म के लिए सर्वोत्तम है।

🗓️ स्नान के लिए उत्तम मुहूर्त

अधिकमास पूर्णिमा पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जो श्रद्धालु सुबह के मुहूर्त से चूक गए हैं, वे अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:57 से दोपहर 12:51 बजे तक) का लाभ उठाकर स्नान-ध्यान कर सकते हैं। पावन नदियों में स्नान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है।

🎁 दान के लिए श्रेष्ठ समय (Daan Muhurat)

शास्त्रों के अनुसार, स्नान के बाद दान करना पुण्य को दोगुना करता है। आज पूर्णिमा पर दान करने के लिए सुबह 08:51 बजे से 10:35 बजे के बीच का समय सबसे उत्तम (अमृत काल के बाद का शुभ समय) है। इस अवधि में किया गया दान अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

🍎 अधिकमास पूर्णिमा पर क्या करें दान?

गर्मी के इस मौसम में अपनी क्षमतानुसार निम्नलिखित वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ और उपयोगी माना गया है:

  • अन्न: चावल, दाल, और आटा।

  • खाद्य पदार्थ: गुड़, घी और दूध।

  • मौसमी फल: आम और केला।

  • उपयोगी वस्तुएं: वस्त्र, छाता और शीतल जल से भरा मिट्टी का मटका।

🙏 अधिकमास पूर्णिमा का महत्व

अधिकमास को भगवान विष्णु का ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दौरान किया गया जप, तप और दान साधक के जीवन के सभी कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

संपादकीय टिप्पणी: अधिकमास की पूर्णिमा आत्म-शुद्धि और परोपकार का पर्व है। क्या आप आज किसी जरूरतमंद की सहायता करने का संकल्प ले रहे हैं? अपने विचार या अनुभव नीचे कमेंट्स में साझा करें।