Pune Liquor Tragedy: जहरीली शराब कांड में मौतों का आंकड़ा 18 पहुंचा; CID जांच शुरू, 8 पुलिसकर्मी निलंबित
महाराष्ट्र के पुणे जिले में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर 18 हो गया है। इस त्रासदी ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन के अनुसार, कई मरीज अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 4 की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच अपराध अन्वेषण विभाग (CID) को सौंप दी गई है।
🧪 जांच में हुआ खुलासा: मेथनॉल का घातक मिश्रण
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि शराब में अधिक मुनाफा कमाने के लिए ऑनलाइन मंगाए गए ‘मेथनॉल’ का प्रयोग किया गया था। जांच में सामने आया है कि 35 लीटर शराब का कैन 1900 रुपये में खरीदकर 2700 रुपये में बेचा जा रहा था। मास्टरमाइंड 73 वर्षीय सिंह तख्त सिंह विरका उर्फ सरदारजी के इशारे पर उरली कांचन गांव में यह अवैध शराब तैयार की जाती थी। पुलिस ने अब तक मुख्य साजिशकर्ता समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
👮 पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल, 8 अधिकारी निलंबित
इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। शुरुआती मौतों को ‘प्राकृतिक मौत’ बताने वाले लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। हडपसर और दापोडी पुलिस थानों के कुल 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कई अधिकारियों का तबादला किया गया है। उन पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने और मामले को गंभीरता से न लेने के आरोप हैं।
📝 पीड़ितों की पहचान और कानूनी कार्रवाई
इस त्रासदी में हडपसर क्षेत्र से यशवंत पवार, राहुल क्षीरसागर, दत्ता सूर्यवंशी सहित 6 लोगों की और पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र से पांडुरंग फुगे, अकबर पठान, राजेश राजपूत सहित 12 लोगों की मौत हुई है। पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। CID की टीम अब मेथनॉल सप्लाई चेन और इस अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े अन्य तत्वों की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
यह घटना अवैध शराब के कारोबारियों के दुस्साहस और तंत्र की खामियों को उजागर करती है। सरकार ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के संकेत दिए हैं।