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Chambal Sand Mining: चंबल में रेत के अवैध खेल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; परिवहन विभाग की दिखावटी कार्रवाई पर सचिव ने उठाए सवाल

ग्वालियर: चंबल नदी से रेत के अवैध उत्खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर के बाद अब प्रदेश के परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने विभाग के आयुक्त उमेश जोगा को पत्र लिखकर भिंड, मुरैना और श्योपुर में की गई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सचिव ने पाया कि जिन वाहनों को अवैध रूप से रेत का परिवहन करते हुए जब्त किया जाना था, उन्हें केवल मामूली शमन शुल्क (फाइन) लेकर छोड़ दिया गया।

📊 विभाग की दिखावटी कार्रवाई का कच्चा-चिट्ठा

सचिव द्वारा तलब की गई रिपोर्ट में तीनों जिलों की स्थिति चौंकाने वाली है:

  • श्योपुर: 20 से 26 मई के बीच 11 वाहन बिना नंबर प्लेट के मिले, जिनमें से 10 को केवल फाइन लेकर छोड़ दिया गया।

  • मुरैना: बिना नंबर प्लेट के 12 ट्रैक्टरों और 54 गुड्स करियर को केवल शमन शुल्क लगाकर मुक्त कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार इनकी तत्काल जप्ती होनी चाहिए थी।

  • भिंड: बिना नंबर प्लेट के 28 ट्रकों को मात्र 500 रुपये का जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया।

⚡ अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश

परिवहन सचिव ने स्पष्ट किया है कि बिना नंबर प्लेट के वाहनों को फाइन लेकर छोड़ना गंभीर त्रुटि है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि:

  • सुस्त कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन की प्रक्रिया शुरू की जाए।

  • जो कर्मचारी पदस्थापना के बाद भी जॉइन नहीं कर रहे, उन्हें दो दिन का अल्टीमेटम दिया जाए।

  • उप परिवहन आयुक्त किरण शर्मा को चंबल मुख्यालय में तैनात किया जाए और परिवहन आयुक्त स्वयं क्षेत्र का भ्रमण करें।

🚫 सुप्रीम कोर्ट के आदेश: क्या है आगे की राह?

सुप्रीम कोर्ट ने चंबल नदी में अवैध खनन और जलीय जीवों पर पड़ रहे खतरे को लेकर नाराजगी जताई है। अब विभाग को इन कड़े निर्देशों का पालन करना होगा:

  1. बिना रजिस्ट्रेशन या फर्जी नंबर प्लेट वाले सभी वाहनों को तत्काल रोककर जप्त किया जाए और राजसात करने की प्रक्रिया शुरू हो।

  2. स्टेटिक पॉइंट्स पर सीसीटीवी कवरेज अनिवार्य हो।

  3. खनन में लिप्त वाहनों के स्वामी और ड्राइवर की सूची प्रतिदिन जिला दण्डाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को सौंपी जाए।

मुरैना में रेत उत्खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच, राज्य सरकार के लिए यह विभाग की छवि सुधारने की एक बड़ी चुनौती बन गई है।