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Bada Mangal 2026: चौथे बड़े मंगल पर बन रहा है दुर्लभ संयोग; भूलकर भी न करें ये गलतियां, नाराज हो सकते हैं बजरंगबली

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल का विशेष और अत्यंत पूजनीय महत्व है। इस साल का चौथा बड़ा मंगल बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। यह पावन दिन न केवल संकटमोचन हनुमान जी, बल्कि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने का भी महापर्व है, क्योंकि इस बार बड़े मंगल के साथ एकादशी का भी शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महासंयोग के दिन अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती भी आपको बहुत भारी पड़ सकती है और बजरंगबली के साथ-साथ श्रीहरि विष्णु भी आपसे नाराज हो सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस दिन आपको किन गलतियों को करने से बचना चाहिए और कौन से नियम अपनाने चाहिए।

❌ चौथे बड़े मंगल और एकादशी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां: इन आदतों से दूर रहने की है सख्त सलाह

धार्मिक नियमों के अनुसार, इस महासंयोग के दिन अपने आचरण और खानपान को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

  • 🚫 तामसिक भोजन का सेवन न करें: बड़े मंगल और एकादशी दोनों ही तिथियां बेहद पवित्र और आध्यात्मिक मानी जाती हैं। इस दिन मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन-प्याज और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तामसिक चीजों का सेवन करने से व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

  • 🤬 क्रोध और विवाद से बचें: हनुमान जी को शांति, निश्छल सेवा और सच्ची भक्ति अत्यंत प्रिय है। इस पुण्यदायी दिन पर किसी से झगड़ा करना, अपशब्द बोलना, अपनों से बड़ों का अनादर करना या मन में किसी के प्रति द्वेष-ईर्ष्या रखना बेहद अशुभ माना जाता है। कोशिश करें कि आप पूरा दिन शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहें।

  • 🙅‍♂️ गरीब और जरूरतमंद का अपमान न करें: बड़े मंगल पर दान-पुण्य और भंडारे का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इस पावन अवसर पर द्वार पर आए किसी जरूरतमंद या याचक को खाली हाथ लौटाना या उसका मजाक उड़ाना, अपमान करना शुभ नहीं माना जाता। अपनी आर्थिक क्षमता अनुसार भोजन, वस्त्र या शीतल जल का दान जरूर करें।

  • 📜 व्रत के नियमों की अनदेखी न करें: अगर आपने चौथे बड़े मंगल या एकादशी का उपवास (व्रत) रखा है, तो उसके कड़े नियमों का पालन जरूर करें। सुबह बिना स्नान किए पूजा घर को छूना, पूजा के बीच बार-बार गुस्सा करना या व्रत के दौरान अनुशासनहीनता बरतना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है।

⚠️ हनुमान जी और श्रीहरि की पूजा में रखें इस बात का विशेष ध्यान: भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें

अक्सर भक्त असमंजस में आकर पूजा सामग्री में गलती कर बैठते हैं। ध्यान रखें कि हनुमान जी की सामान्य पूजा में कुछ विशिष्ट सामग्रियां वर्जित मानी जाती हैं, जबकि भगवान विष्णु को तुलसी दल (तुलसी की पत्तियां) बेहद प्रिय हैं। इसलिए इस महासंयोग पर समानांतर पूजा करते समय यह विशेष ध्यान रखें कि किस देवता को कौन-सी सामग्री अर्पित करनी है। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल प्रिय है, जबकि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी को अनिवार्य रूप से शामिल करें ताकि पूजा सफल हो सके।

🎭 झूठ और छल-कपट से हमेशा रहें दूर: मन, वचन और कर्म की पवित्रता है बेहद जरूरी

सनातन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगल और एकादशी के पवित्र दिन पर झूठ बोलना, किसी के साथ विश्वासघात करना, धोखा देना या किसी भी प्रकार का गलत व अनैतिक कार्य करना भारी पाप का भागी बनाता है। इस दिन मनुष्य को अपने मन, वचन और कर्म से पूरी तरह शुद्ध और पवित्र रहने का गंभीर प्रयास करना चाहिए, तभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।

✨ चौथे बड़े मंगल पर अवश्य करें ये शुभ काम: जीवन के सारे कष्ट और संकट होंगे दूर

इस पावन महासंयोग के दिन पुण्य लाभ कमाने और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए निम्नलिखित शुभ कार्य अवश्य करने चाहिए:

  • 📖 पाठ और मंत्र जाप: इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद शांत मन से हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।

  • 🍎 विशेष भोग और अर्पण: संकटमोचन हनुमान जी को इस दिन चटक सिंदूर, चमेली का तेल, चोला, बूंदी या शुद्ध देसी घी के बेसन के लड्डू अर्पित करें। वहीं, भगवान विष्णु की वेदोक्त पूजा में पीले रंग के फूल, ऋतु फल, तुलसी दल और गाय के दूध से बना पंचामृत अवश्य उपयोग करें।

  • 💧 सेवा और भंडारा: इस दिन मुख्य मंदिरों में जाकर भक्तों के बीच बूंदी का प्रसाद बांटना, राहगीरों को ठंडा व मीठा पानी (शर्बत) पिलाना और भूखे गरीबों को आदरपूर्वक भोजन कराना महापुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इन उपायों को करने से कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत होते हैं, जीवन के बड़े से बड़े कष्ट दूर होते हैं और साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

🕉️ जानिए क्या है इस महासंयोग की पौराणिक और धार्मिक मान्यता

शास्त्रों और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल पर जो भी भक्त पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा, आराधना और सेवा करता है, बजरंगबली उसके जीवन के सभी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संकटों को पल भर में हर लेते हैं। दूसरी ओर, एकादशी का व्रत सनातन धर्म में सभी व्रतों में श्रेष्ठ और भगवान विष्णु की परम कृपा दिलाने वाला माना गया है। ऐसे में जब यह दोनों शुभ और मंगलकारी संयोग एक ही दिन एक साथ बन रहे हों, तब पूजा-पाठ, दान-पुण्य और नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करना भक्तों के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण व कल्याणकारी हो जाता है।