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Nashik TCS Case: नासिक टीसीएस यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में बड़ा एक्शन; कोर्ट में 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक स्थित आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टीसीएस (TCS) परिसर में कथित तौर पर हुए यौन उत्पीड़न, गंभीर शोषण और जबरन धर्मांतरण (Forced Conversion) के सनसनीखेज मामले में नासिक पुलिस ने शुक्रवार को सत्र न्यायालय के समक्ष अपना पहला आधिकारिक आरोपपत्र (Charge-sheet) दाखिल कर दिया है। पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्य आरोपी दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के स्थानीय पार्षद मतीन मजीद पटेल के खिलाफ देवलाली कैंप पुलिस थाने में दर्ज मामले के तहत यह 1,500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र पेश किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से ही शहर का राजनीतिक और सामाजिक माहौल काफी गरमाया हुआ है।

पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में अब तक अलग-अलग थानों में कुल नौ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और आठ आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल पर यह गंभीर आरोप है कि जब महिला आरोपी निदा खान गिरफ्तारी के डर से पुलिस से फरार चल रही थी, तब उन्होंने कानून को ठेंगा दिखाते हुए उसे छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्थित अपने निजी आवास में अवैध रूप से पनाह दी थी और उसे छिपाने में मदद की थी।

⚖️ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज: व्हाट्सएप चैट और ईमेल ट्रेल्स बने मुख्य आधार

अदालत में पेश किए गए इस 1,500 पन्नों के आरोपपत्र में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कई कड़े और गैर-जमानती प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने मुख्य रूप से बीएनएस की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र), 64 (बलात्कार), 68 (अधिकार प्राप्त व्यक्ति द्वारा यौन संबंध), 69 (धोखाधड़ी के साधनों का प्रयोग करके यौन संबंध), 46 (उकसाना), 75 (यौन उत्पीड़न), 318(4) (धोखाधड़ी), 299 (धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाना) और 249 (अपराधी को शरण देना) के तहत पुख्ता केस तैयार किया है।

इस चार्जशीट में मुख्य सबूत के तौर पर पीड़ित महिलाओं और आरोपियों के बीच हुई आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट (WhatsApp Chat) के स्क्रीनशॉट, जब्त किए गए आधिकारिक व निजी ईमेल ट्रेल्स और डिजिटल फॉरेंसिक डेटा को शामिल किया गया है। मालूम हो कि टीसीएस की नासिक इकाई में काम करने वाली आठ महिला कर्मचारियों के सामने आने और प्रताड़ना का आरोप लगाने के बाद देवलाली कैंप पुलिस थाने में एक मामला और मुंबई नाका पुलिस थाने में आठ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे।

💻 “उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति”: टीसीएस ने कड़ा कदम उठाते हुए आरोपी कर्मचारियों को किया निलंबित

सॉफ्टवेयर और आईटी क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार टीसीएस (Tata Consultancy Services) ने अपने नासिक कार्यालय में हुई इन आपराधिक घटनाओं और आंतरिक सुरक्षा में चूक के मामलों के उजागर होने के बाद एक आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कार्यस्थल पर किसी भी रूप में महिलाओं के साथ उत्पीड़न, शोषण और जबरदस्ती के कृत्यों के प्रति ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ (Zero Tolerance Policy) की सख्त नीति अपनाती है। कंपनी प्रबंधन ने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और पुलिसिया कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए नासिक कार्यालय में इस घिनौने कृत्य और यौन उत्पीड़न में कथित रूप से शामिल पाए गए सभी संबंधित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबित कर दिया है।

🔍 डिजिटल साक्ष्य और पहचान परेड से कसेगा शिकंजा: मजिस्ट्रेट के सामने 17 गवाहों के बयान कराए गए दर्ज

एसआईटी (SIT) की जांच टीम ने आरोपपत्र को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए कई अकाट्य वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य एकत्रित किए हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • गवाहों के बयान: बीएनएसएस (BNSS) की धारा 183 के तहत प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष 17 प्रमुख चश्मदीद गवाहों के गोपनीय बयान दर्ज कराए गए हैं।

  • मेडिकल रिपोर्ट: पीड़िता और सभी नामजद आरोपियों की विस्तृत और पुख्ता फॉरेंसिक व मेडिकल जांच रिपोर्ट को संलग्न किया गया है।

  • धार्मिक उत्पीड़न के सबूत: पीड़ितों पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने के दबाव और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से जुड़े कई मौखिक व लिखित साक्ष्य।

  • डिजिटल साक्ष्य: आरोपियों के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट के प्रमाणित स्क्रीनशॉट और रिकवर किए गए डिलीटेड ईमेल ट्रेल्स।

  • दस्तावेजों की जब्ती: पीड़ितों का जबरन नाम और पहचान बदलने के उद्देश्य से आरोपियों द्वारा डरा-धमकाकर लिए गए उनके मूल शैक्षणिक व व्यक्तिगत दस्तावेज पुलिस ने बरामद कर लिए हैं।

  • फोरेंसिक पंचनामा: घटनास्थल का विस्तृत पंचनामा, बैंक अकाउंट स्टेटमेंट्स (आर्थिक लेन-देन), वैध जाति प्रमाणपत्र, अपराध में इस्तेमाल किए गए वाहन, जब्त की गई सामग्रियों की जेल में कराई गई पहचान परेड (TIP) और आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात।

📋 पूरक आरोपपत्र (Supplementary Charge-sheet) भी होगा दाखिल: कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं कीं खारिज

हालांकि नासिक पुलिस ने अब तक मिले पुख्ता प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में पहला आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस बड़े रैकेट की जांच अभी भी पूरी तरह जारी रहेगी। पुलिस आने वाले दिनों में कुछ और डिजिटल और आर्थिक साक्ष्य जुटाकर बीएनएसएस की धारा 193(9) के तहत कोर्ट में एक पूरक आरोपपत्र (Supplementary Charge-sheet) भी दाखिल करेगी।

इसके साथ ही, मुंबई नाका पुलिस थाने में दर्ज अन्य 8 मामलों में भी तफ्तीश अपने अंतिम चरण में है, जिन्हें निर्धारित कानूनी समयसीमा के भीतर कोर्ट रूम तक पहुंचाया जाएगा। इस मामले की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले इसके असर को देखते हुए सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं (Bail Pleas) को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिससे उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा।