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Kashmir Offbeat Tourism: दिल्ली-जयपुर की 44°C गर्मी से राहत; कश्मीर के 12,000 फीट ऊंचे ‘रजदान पास’ पर बर्फबारी का मजा ले रहे पर्यटक

श्रीनगर: जैसे-जैसे उत्तरी भारत के मैदानी राज्यों में ग्रीष्मकाल का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है, वैसे ही कश्मीर घाटी में चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए घूमने जाने वाले देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस बार खास बात यह है कि ये पर्यटक पारंपरिक स्थलों के बजाय ऐसे इलाकों को चुन रहे हैं, जो कम जाने-पहचाने और सुंदर सीमावर्ती इलाके (Border Areas) हैं। इस कड़ी में उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले का ‘रजदान पास’ (Razdan Pass), जो समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है, एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण के तौर पर उभरा है। यहाँ मई के महीने में भी पहाड़ों पर चांदी जैसी सफेद बर्फ जमी हुई है, जो दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में पड़ रही भीषण गर्मी के बिल्कुल विपरीत है और महानगरों के लोगों को अपनी ओर तेजी से आकर्षित कर रही है।

🏍️ देश भर से बाइकर्स, युवा और परिवार के साथ पहुंच रहे हैं टूरिस्ट: ठंडी हवाओं और गुरेज घाटी के सुंदर रास्तों का उठा रहे लुत्फ

वर्तमान में पूरे भारत से टूरिस्ट, जिनमें परिवार के साथ आने वाले लोग, एडवेंचर बाइकर्स और युवा यात्री शामिल हैं, रजदान पास की प्राकृतिक बर्फ, हाड़ कंपाने वाली ठंडी हवाओं और सुरम्य गुरेज घाटी (Gurez Valley) की ओर जाने वाले अद्भुत व सुंदर रास्ते का आनंद लेने के लिए इस पास पर भारी संख्या में उमड़ रहे हैं। मीडिया से बातचीत करते हुए दिल्ली से आए पर्यटक रोहन मेहता ने अपने इस जादुई अनुभव को बिल्कुल अविश्वसनीय बताया। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली की 42 डिग्री की झुलसाने वाली भीषण गर्मी को पीछे छोड़कर आए थे और महज एक दिन के भीतर खुद को चारों तरफ से बर्फ के बीच खड़ा पाया, यह किसी सपने जैसा है।

इसी तरह राजस्थान के जयपुर से आई अंजलि शर्मा ने कहा कि यहाँ के बेहद ठंडे मौसम ने उन्हें जयपुर के 44 डिग्री के टॉर्चर करने वाले तापमान से काफी बड़ी राहत दी है। वहीं केरल से आए युवा यात्री फाजिल ने बताया कि रजदान पास के इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल सोशल मीडिया वीडियो देखकर ही उन्हें यहाँ आने की मुख्य प्रेरणा मिली थी, जबकि कर्नाटक की केबिन क्रू सदस्य एहाना ने इसे अपने बचपन का एक बड़ा सपना सच होने जैसा बताया, यानी असल जिंदगी में कुदरती बर्फ को पहली बार अपनी आंखों के सामने देखना।

🏔️ गुलमर्ग-सोनमर्ग के अलावा अब दूरदराज वाले पर्यटन स्थलों पर बढ़ रही भीड़: स्थानीय दुकानदारों और ढाबा संचालकों की हुई बंपर कमाई

घाटी में पर्यटन के बदलते पैटर्न को देखें तो गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम जैसे पारंपरिक पर्यटन स्थलों के अलावा अब उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के कई ऐसे अछूते इलाके भी हैं जहां पहले सुरक्षा या अन्य कारणों से बहुत कम लोग जाते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण वहां पर्यटकों की आवाजाही तेजी से बढ़ रही है। इस सकारात्मक बदलाव से स्थानीय लोगों को बड़ा आर्थिक संबल मिल रहा है; सड़क किनारे बने स्थानीय ढाबे, चाय-कॉफी के स्टॉल, हस्तशिल्प की दुकानें और परिवहन सेवा (टैक्सी-ड्राइवर्स) से जुड़े लोगों को इससे सीधा वित्तीय फायदा हो रहा है। श्रीनगर के कमर्शियल ड्राइवर बशीर अहमद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि अब पर्यटक उन ऑफबीट जगहों को भी घूमने की जिद करते हैं, जिनके बारे में पहले किसी को ज़्यादा जानकारी नहीं थी। इससे इस सीजन में सुदूर सीमावर्ती गांवों के लोगों की अच्छी दैनिक कमाई हो रही है।

📈 सरकार के प्रयासों से बदल रही है सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था: जलवायु से प्रेरित यात्रा के रुझान से युवाओं को मिले रोजगार के अवसर

जम्मू-कश्मीर पर्यटन विभाग के उच्च अधिकारियों का भी मानना ​​है कि यह ऐतिहासिक बदलाव लोगों की यात्रा से जुड़ी पसंद (Travel Preferences) में आए बड़े बदलाव का सीधा नतीजा है, जहां मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी के चलते ज़्यादा से ज़्यादा लोग अब हिमालयी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में केंद्र और राज्य सरकार ने कश्मीर के दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट समेत कई जमीनी कदम उठाए हैं और स्थानीय ग्रामीण जनता का कहना है कि इन सरकारी प्रयासों का सीधा फायदा अब धरातल पर नजर आ रहा है।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या धीरे-धीरे इन दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों की पूरी अर्थव्यवस्था को बदल रही है, क्योंकि अब पर्यटक केवल चुनिंदा पारंपरिक हिल स्टेशनों तक ही सीमित न रहकर, प्रकृति की उन अछूती और अद्भुत सुंदरताओं को भी खोजने निकल पड़े हैं, जहां पहले मानवीय गतिविधियां बेहद कम थीं। पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या से यह बात साफ जाहिर होती है कि जलवायु से प्रेरित यात्रा के रुझान, यानी गर्मियों में राहत की तलाश किस तरह कश्मीर में ‘ऑफबीट’ पर्यटन को नया जीवन दे रहे हैं। साथ ही, इससे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय कश्मीरी समुदायों को रोजगार और सम्मानजनक आजीविका के ऐसे बेहतरीन अवसर भी मिल रहे हैं, जिनकी उन्हें लंबे समय से सख़्त जरूरत थी।