ब्रेकिंग
Dhar Mega Theft: धार के कवठी में बड़ी चोरी; शादी के लिए घर में रखे 60 लाख के जेवर ले उड़े बदमाश, CCT... MP Government Teacher Row: शराब के नशे में होश खो बैठा सरकारी स्कूल का गुरुजी; गलियों में घूमने के ब... Katni Road Accident: महाकाल दर्शन कर लौट रहे UP के बैंक कर्मियों की कार ट्रक में घुसी; 2 की मौत, 3 ग... Dhar Bhojshala News: हाई कोर्ट के आदेश के बाद पहला शुक्रवार; धार भोजशाला में नमाज बंद, मां वाग्देवी ... सावधान! अभी तो सिर्फ गर्मी का ट्रेलर है, असली 'फिल्म' 25 मई से होगी शुरू; 9 दिन बरसने वाली है आग! Cockroach Janta Party: क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी'? 30 साल के युवक ने सोशल मीडिया पर चुटकियों में ख... Rajnath Singh South Korea Visit: सियोल में गरजे राजनाथ सिंह—'भारत को विकसित देश बनने से दुनिया की को... Alwar Car Suffocation Death: अलवर में दिल दहला देने वाला हादसा; कार में बंद होने से दो मासूम सगी बहन... Muzaffarpur Crime News: मुजफ्फरपुर में दिनदहाड़े प्रोपर्टी डीलर की गोली मारकर हत्या; मुंह और सीने मे... NEET UG Paper Leak: पेपर लीक मामले पर बड़ी कार्रवाई; संसदीय समिति ने NTA प्रमुख और शिक्षा मंत्रालय क...

Jharkhand Medicine Strike: झारखंड में 18 हजार से ज्यादा दवा दुकानें बंद; ऑनलाइन फार्मेसी और डीप डिस्काउंटिंग का विरोध

रांची: ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स और झारखंड केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (JCDA) के संयुक्त आह्वान पर बुधवार को झारखंड के चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा असर देखा गया। अपनी विभिन्न नीतिगत मांगों को लेकर राज्य की 18 हजार से ज्यादा थोक और खुदरा दवा दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। इस बेमियादी और रणनीतिक हड़ताल के कारण आम मरीजों को सुबह से ही दवाइयां खरीदने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, मानवीय संवेदनाओं और आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ने झारखंड के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों (हॉस्पिटल्स) के भीतर संचालित होने वाली फार्मेसी दुकानों को इस बंद से पूरी तरह मुक्त रखा है, जिससे गंभीर मरीजों को राहत मिली।

📋 मुख्य रूप से तीन मांगों को लेकर दवा दुकानदारों की राष्ट्रव्यापी बंदी: जेसीडीए (JCDA) ने बंद को बताया पूरी तरह सफल

इस बड़े आंदोलन के संबंध में झारखंड ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश कार्यालय सचिव संजीव बनर्जी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यतः तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आज देश भर के दवा दुकानदारों की यह राष्ट्रव्यापी बंदी आयोजित की गई है। झारखंड में इस बंद का व्यापक असर देखा गया है और यह पूरी तरह सफल है। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य ऑनलाइन फार्मेसी (E-Pharmacy) के अनियंत्रित डिजिटल विस्तार को रोकना और बड़े कॉरपोरेट घरानों की कथित शोषणकारी व एकाधिकारवादी मूल्य निर्धारण नीति (Pricing Policy) के खिलाफ सरकार तक अपनी मजबूत आवाज पहुंचाना है।

📱 एआई (AI) आधारित फर्जी प्रिस्क्रिप्शन और एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग बढ़ा: कोरोना काल की व्यवस्था पर उठाए सवाल

संजीव बनर्जी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के संकट काल में दवाओं को मरीजों के घर-घर तक पहुंचाने (होम डिलीवरी) का निर्देश केंद्र सरकार द्वारा दिया गया था। उस वक्त के असाधारण हालात और जनहित को देखते हुए केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने सरकार के उस आपातकालीन निर्णय का स्वागत किया था। लेकिन विडंबना यह है कि महामारी खत्म होने के बाद भी वही अस्थायी व्यवस्था आज भी धड़ल्ले से चली आ रही है, जिसके तहत तकनीकी स्तर पर कई तरह की गंभीर गड़बड़ियां हो रही हैं। आज कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना किसी पर्याप्त भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के धड़ल्ले से एलोपैथिक दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे एक ही डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार उपयोग कर दवाएं मंगाई जा रही हैं। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए एंटीबायोटिक और अत्यधिक नशीली दवाओं की अवैध उपलब्धता बाजार में बढ़ रही है, जिससे देश में एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) का खतरा खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है।

💰 कॉरपोरेट घरानों की “डीप डिस्काउंटिंग” नीति से छोटे केमिस्टों का अस्तित्व संकट में: बाजार संतुलन बिगाड़ने का आरोप

इसके अलावा, एसोसिएशन ने बड़े कॉरपोरेट घरानों और टेक कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही “डीप डिस्काउंटिंग” (अत्यधिक छूट) की व्यापारिक नीति का भी कड़ा विरोध किया है। संजीव बनर्जी ने कहा कि भारत में आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं की कीमतें पहले से ही नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा पूरी तरह नियंत्रित और फिक्स हैं। इसके बावजूद कॉरपोरेट कंपनियां पूंजी के बल पर बाजार में अनुचित और अनैतिक प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं। इस घाटे के सौदे वाले व्यापार मॉडल (Loss Leader Model) के कारण छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक केमिस्टों का आर्थिक अस्तित्व पूरी तरह से संकट में पड़ गया है, जिससे लाखों परिवारों के रोजगार पर तलवार लटक गई है।

⚖️ ऑनलाइन दवा बेचने का अधिकार देने वाले कानून ‘GSR 220 E’ को तुरंत रद्द करे सरकार: नकली दवाओं की सप्लाई का खतरा

एसोसिएशन के शीर्ष नेताओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार से मांग की है कि राजपत्र अधिसूचना GSR 220 E, जो ऑनलाइन कंपनियों को इंटरनेट पर दवा बेचने का कानूनी अधिकार देती है, उसे तत्काल प्रभाव से रद्द या संशोधित किया जाए। केमिस्टों का दावा है कि इस ऑनलाइन रूट के कारण बाजार में बड़े पैमाने पर नकली, एक्सपायर्ड और घटिया दर्जे की दवाएं भी चुपके से जनता के बीच खपाई जा रही हैं, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आज राजधानी रांची सहित धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो जैसे राज्यभर के सभी प्रमुख शहरों में अधिकांश थोक और खुदरा दवा काउंटर्स पर ताले लटके रहे, जिसके चलते जरूरत पड़ने पर आम लोग केवल अस्पतालों के भीतर स्थित इन-हाउस दवा दुकानों से ही कतारों में लगकर दवा लेने को मजबूर दिखे।