Bhojshala Case Update: भोजशाला में साल के सभी दिन पूजा कर सकेंगे हिंदू, हाई कोर्ट के फैसले के बाद ASI का नया आदेश
धार: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला परिसर को सरस्वती मंदिर करार दिए जाने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने शनिवार को नया आदेश जारी कर हिंदू समुदाय को वहां पूजा-अर्चना के लिए निर्बाध प्रवेश की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस पुराने आदेश को भी पूरी तरह निरस्त कर दिया था, जिसके तहत धार जिले में स्थित इस ऐतिहासिक परिसर में मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार की नमाज अदा करने की विशेष अनुमति दी गई थी। कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।
🪷 देवी वाग्देवी को समर्पित स्थल: एएसआई अधिकारी ने बताया संस्कृत भाषा और साहित्य के अध्ययन का प्राचीन केंद्र
एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि भोजशाला प्राचीन काल से ही संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के अध्ययन एवं अनुसंधान का एक मुख्य केंद्र होने के साथ-साथ देवी वाग्देवी (माता सरस्वती) को समर्पित एक पवित्र मंदिर भी रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए हिंदू समुदाय को माता सरस्वती की पूजा-अर्चना और अध्ययन की प्राचीन परंपरा के तहत परिसर के भीतर बिना किसी बाधा के प्रवेश करने और अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई है।
📜 कमाल मौला मस्जिद का जिक्र हटा: एएसआई ने नई प्रेस रिलीज में केवल ‘भोजशाला’ नाम दर्ज किया
ASI के नए आदेश के मुताबिक, अब साल के सभी दिन बिना किसी रोक-टोक के हिंदुओं का प्रवेश भोजशाला में सुनिश्चित होगा। एएसआई ने अपनी नई प्रेस रिलीज और आधिकारिक रिकॉर्ड से ‘कमाल मौला मस्जिद’ का जिक्र पूरी तरह हटाकर अब केवल ‘भोजशाला’ नाम दर्ज कर लिया है। बता दें कि इससे पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक दस्तावेजों में इस परिसर को ‘भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद’ लिखा जाता था। इस नए आदेश में भोजशाला को राजा भोज द्वारा स्थापित प्राचीन संस्कृत पाठशाला के रूप में संबोधित किया गया है।
🛡️ एएमएएसआर अधिनियम के तहत रहेगा स्मारक: जिला प्रशासन और पुरातत्वविद् तय करेंगे दर्शन का समय
एएसआई के आधिकारिक आदेश में आगे कहा गया है कि भोजशाला परिसर एएमएएसआर (AMASR) अधिनियम 1958 के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक बना रहेगा। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं के प्रवेश और पूजा-अर्चना का दैनिक समय स्थानीय जिला प्रशासन और अधीक्षण पुरातत्वविद् मिलकर आपसी समन्वय से तय करेंगे। हाईकोर्ट के इस फैसले और एएसआई के नए दिशा-निर्देशों के सामने आने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों और आम श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पक्ष: इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त
इंदौर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ जिक्र किया कि ऐतिहासिक, पुरातात्विक और स्थापत्य साक्ष्य भोजशाला को राजा भोज के समय का प्रतिष्ठित संस्कृत अध्ययन केंद्र और देवी सरस्वती को समर्पित स्थल साबित करते हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष ने फैसले का गहन अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेंगे। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और भोजशाला परिसर के आसपास सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है।