ब्रेकिंग
Jalandhar Crime: जालंधर के कबीर नगर में दो गुटों में खूनी संघर्ष, जमकर चले ईंट-पत्थर और गोलियां Patiala Central Jail: पटियाला पुलिस का बड़ा सर्च ऑपरेशन, फरार कैदियों की तलाश में CIA की छापेमारी Amritsar News: अमृतसर में अवैध कॉलोनियों पर चला पीला पंजा, ADA ने वडाला भिट्टेवड्ड में की बड़ी कार्र... Punjab Haryana High Court: बैंक खाता फ्रीज करने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पूरी बैंकिंग नहीं रोक सकत... Punjab Weather Alert: पंजाब के 6 जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी, बारिश और तूफान की चेतावनी Jalandhar Power Cut: जालंधर के इन इलाकों में 16 मई को रहेगा पावर कट, देखें पूरी लिस्ट Jalandhar News: 'फर्जी सनातनियों' के मंसूबे ध्वस्त, बालाजी महाराज के कार्यक्रम पर भाजपा का 'आप' पर त... Punjab Agriculture Protest: कृषि और बागवानी अधिकारियों ने खोला मोर्चा, खाली पदों और पे-पैरिटी को लेक... Ludhiana MC News: लुधियाना नगर निगम में नियमों की धज्जियां, मेयर-कमिश्नर के पास दो-दो गाड़ियां Jalandhar Crime: फुटबॉल चौक पर चोरों के हौसले बुलंद, GS Honda शोरूम के पास से बाइक चोरी

Dhar Bhojshala Verdict: धार भोजशाला पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मंदिर करार देकर दिया पूजा का अधिकार

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुना दिया है। अदालत ने भोजशाला को मंदिर करार देते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-पाठ का अधिकार दिया है। इंदौर खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई थी। ऐतिहासिक साहित्य यह स्थापित करता है कि विवादित क्षेत्र परमार वंश के राजा भोज से संबंधित संस्कृत शिक्षा के केंद्र (भोजशाला) के रूप में जाना जाता था।

🔍 ASI की वैज्ञानिक रिपोर्ट पर अदालत की मुहर: पुरातत्व साक्ष्यों को माना आधार

कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या यह वाग्देवी मंदिर है या कमल मौला मस्जिद। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुरातत्व एक विज्ञान है और हम एएसआई (ASI) के निष्कर्षों पर भरोसा करते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह एक संरक्षित इमारत है और इसका नियंत्रण एएसआई के पास है। अदालत ने अयोध्या मामले की मिसाल और संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 के तहत मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।

🛡️ सुरक्षा के कड़े इंतजाम: नमाज के बीच आया फैसला, शहर में भारी पुलिस बल तैनात

अदालत का यह फैसला उस समय आया जब शुक्रवार होने के कारण भोजशाला में नमाज अदा की जा रही थी। प्रशासन ने फैसले के मद्देनजर धार में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए, नाकेबंदी की गई और सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी गई। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से चर्चा कर शांति बनाए रखने की अपील की, जिसके चलते नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।

📊 98 दिनों का सर्वे और 2,000 पन्नों की रिपोर्ट: क्या मिला था भोजशाला के अंदर?

हाई कोर्ट के आदेश पर एएसआई ने 22 मार्च 2024 से जून 2024 के अंत तक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे किया था। 15 जुलाई 2024 को सौंपी गई 2,000 पन्नों की रिपोर्ट में बताया गया कि वर्तमान ढांचे का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के अवशेषों, नक्काशीदार स्तंभों और शिलालेखों का उपयोग करके किया गया था। वहां परमार काल की मूर्तियां और संस्कृत शिलालेख भी मिले हैं, जो मंदिर के दावे को पुष्ट करते हैं।

⏳ दशकों पुराना विवाद और विभिन्न पक्ष: हिंदू, मुस्लिम और जैन समाज के दावे

यह कानूनी लड़ाई 2022 में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका के बाद तेज हुई थी।

  • हिंदू पक्ष: इसे 11वीं सदी का सरस्वती मंदिर और गुरुकुल मानता है।

  • मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमलुद्दीन सोसाइटी): इसे सदियों पुरानी मस्जिद बताता है और सर्वे रिपोर्ट को पक्षपाती करार दिया है।

  • जैन पक्ष: हाल ही में जैन समाज ने भी दावा किया कि यह मूल रूप से जैन गुरुकुल था और वहां मिली प्रतिमा जैन यक्षिणी अंबिका की है। अदालत ने अब इन सभी ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मंदिर के पक्ष में निर्णय दिया है।