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Kedarnath Dham Kapat Opening 2026: खुल गए बाबा केदारनाथ के कपाट, ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंजी घाटी; देखें अलौकिक पहली तस्वीर

Kedarnath Dham Door Open: उत्तराखंड की पावन धरती पर एक बार फिर भक्ति और आस्था का महासंगम देखने को मिल रहा है. अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सबसे पहले गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे. इसके बाद आज पवित्र केदारनाथ धाम के कपाट भी पूरे विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं. चारधाम यात्रा के क्रम में अब अगला पड़ाव बद्रीनाथ धाम है, जिसके कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. इन चारों धामों के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा अपने पूरे स्वरूप में आ जाती है और लाखों श्रद्धालु देवभूमि की ओर रुख करते हैं.

51 क्विंटल फूलों से हुआ बाबा का दिव्य श्रृंगार

बाबा केदार के स्वागत के लिए मंदिर परिसर को भव्य रूप दिया गया था. ऋषिकेश और अन्य क्षेत्रों से लाए गए 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से मंदिर का श्रृंगार किया गया था. कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु धाम पहुंचे. जैसे ही मुख्य द्वार खुला, बम-बम भोले और जय केदार से पूरी केदारघाटी गुंजायमान हो उठी.

11वां ज्योतिर्लिंग: जहां देवता भी करते हैं पूजा

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ धाम 11वें ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रतिष्ठित है. इस धाम की महिमा निराली है. मान्यता है कि ग्रीष्मकाल के 6 महीने यहां मनुष्य भगवान की पूजा करते हैं, जबकि शीतकाल में जब कपाट बंद होते हैं, तब खुद देवता यहां पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं. भारी बर्फबारी के कारण शीतकाल में बाबा की डोली नीचे ले आई जाती है. छह माह तक भगवान की पूजा उनके शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में संपन्न होती है. केदारनाथ धाम उत्तराखंड के पंच केदार में प्रथम केदार के रूप में पूजा जाता है.

केदारनाथ धाम का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार, केदारनाथ धाम का संबंध महाभारत काल से है. कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज में हिमालय आए थे. भगवान शिव ने बैल का रूप धारण किया था, और जिस स्थान पर उनका पृष्ठ भाग (पीठ) प्रकट हुआ, वहीं केदारनाथ धाम बना. केदारनाथ को मोक्ष का द्वार माना जाता है. आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था.